आबकारी नीति में यह प्रावधान किया गया कि कारोबार का संचालन और शराब की खरीद और बिक्री के लिए एचपीबीएल एकमात्र एजेंसी रहेगी। जयराम सरकार ने निर्णय लिया कि एचपीबीएल बंद होगी और पूर्व सरकार के इस निर्णय से हुए राजस्व नुकसान की जांच करवाई जाएगी।
आबकारी विभाग ने सरकार के निर्णय के बाद एचपीबीएल के माध्यम से हुई खरीद और बिक्री को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की। करीब डेढ़ सौ करोड़ की गड़बड़ी का अनुमान है। फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी गई, लेकिन उस पर अग्रिम कार्रवाई का निर्णय नहीं हुआ। अब दोबारा मामला कैबिनेट में आएगा। कैबिनेट से तय होगा कि प्रकरण की जांच कौन करेगा।