प्रदेश सरकार दो अक्तूबर से प्रदेश भर में विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत राजस्व संबंधी हर तरह की सेवा लोगों को घर-द्वार के पास मिलेगी। इसके तहत हर गांव में संबंधित क्षेत्र के राजस्व अधिकारी कैंप लगाकर लोगों को इंतकाल एवं निशानदेही प्रक्रियाओं को पूरा कर लोगों की जरूरत वाले सभी प्रमाणपत्र वहीं जारी करेंगे।
तीन महीने तक चलने वाले इस विशेष अभियान से उन लोगों को खासी राहत मिलेगी, जिन्हें सिर्फ अपने प्रमाणपत्र के लिए दूरदराज स्थित तहसील या एसडीएम कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि गांवों से लोग मूल हिमाचली प्रमाण पत्र, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग अथवा आय प्रमाण पत्र बनवाने को तहसीलों तथा उपमंडल मुख्यालयों में आते हैं।
इन प्रमाण पत्रों को बनवाने के लिए लोगों को पटवारी तथा कानूनगो जैसे राजस्व कर्मियों से रिपोर्ट लेनी पड़ती है। उसके बाद तहसील या उपमंडल मुख्यालय में जाकर तहसीलदार अथवा संबंधित एसडीएम से प्रमाणपत्र ले पाते हैं। इसमें लोगों को काफी परेशानी आती है। उनका बहुमूल्य समय भी बर्बाद होता है। ऐसे में सिस्टम में बदलाव कर लोगों को सुविधा देने की कोशिश की जाएगी।
मुख्य सचिव वीसी फारका ने बताया कि सभी उपायुक्तों को कैलेंडर तैयार करके इसे विज्ञापित एवं इसका व्यापक प्रचार और प्रसार कर फील्ड में शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि लोग प्रमाणपत्र के लिए गांव अथवा समीपवर्ती क्षेत्रों में शिविरों में पहुंचकर सुविधा का लाभ उठा सकें। बताया कि इस दौरान सभी उपायुक्तों को छह माह से अधिक अवधि के लंबित मामलों का निपटारा आगामी तीन महीनों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।