इस पाठ में नशे के आदी हो चुके एक परिवार के मुखिया की कहानी है। नशे के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है। मुखिया को बीमारियां घेर लेती हैं। फिर उसे अहसास होता है कि वह परिवार पर बोझ बन गया है।
उसे अपनी गलती का अहसास होता है। उसका बेटा जो इस बर्बादी को देखता और महसूस करता है। बेटा शपथ लेता है कि वह जीवन भर खुद को नशे से दूर रखेगा और समाज-अपने दोस्तों को भी इस बुरी आदत से दूर रहने में जागरूक करेगा।
साहित्यकारों और शिक्षाविदों के साथ मिलकर छात्रों को जागरूक करने के लिए यह कहानी लिखी है। पूरी टीम ने इस पर काम किया है। कहानी को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए स्कूल शिक्षा बोर्ड को भेज दिया गया है। इससे पूर्व परिषद ने सड़क सुरक्षा को लेकर तैयार किए गए पाठ ‘खुशी शहर आई’ पहले ही कक्षा पांच की पर्यावरण की पुस्तक में शामिल किया जा चुका है। - डॉ. नम्रता टिक्कु, प्राचार्य एससीईआरटी सोलन