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निशुल्क पढ़ाई के प्रलोभनों की बजाय गुणात्मक शिक्षा पर फोकस हो बजट

Fri, 01 Feb 2019 01:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
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संसार राणा, प्रवक्ता अर्थशास्त्र
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निशुल्क चीजों का प्रलोभन देकर सरकारी स्कूलों में बच्चों का दाखिला बढ़ाने को चली आ रही परंपरा को समाप्त करने का समय आ गया है। सरकार को शिक्षा में गुणात्मकता बढ़ाने वाला बजट पेश करने की जरूरत है। निजी स्कूलों के फैलते जाल और सरकारी स्कूलों पर ताले लटकने से रोकने को शिक्षकों के रिक्त पद भरने, टीचर ट्रेनिंग पर जोर देने, स्मार्ट क्लासरूम और इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई शुरू करवाने की जरूरत है। नौ फरवरी को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के दूसरे बजट से शिक्षा क्षेत्र को ढेरों उम्मीदें हैं। 

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शिक्षा क्षेत्र में सुधार को रिक्त पद भरने के लिए बजट में विशेष प्रावधान करना होगा। एक-दो शिक्षकों के सहारे चल रहे स्कूलों को मजबूत करना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों पर अभिभावकों का अधिक विश्वास है। इसे बरकरार रखने के लिए शिक्षा में आ रहे निरंतर बदलाव को लेकर शिक्षकों को अपडेट करना होगा। डिजिटल माध्यम से पढ़ाई शुरू करनी होगी।

ऑनलाइन स्टडी मैटीरियल, कंप्यूटर लैब, डिजिटल ब्लैक बोर्ड का इंतजाम करना होगा। वोकेशनल शिक्षा देने के साथ लैंग्वेज लैब भी अब वक्त की जरूरत है। बच्चों को कई भाषाओं में निपुण बनाने पर काम करना होगा। स्कूल-कॉलेज भवन निर्माण, विवि में प्लेसमेंट सैल को मजबूत करने, कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट के लिए बजट में विशेष प्रावधान करने की जरूरत है।

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न बैग मिले न वर्दी-लैपटॉप, ट्रांसफर पॉलिसी का वादा भी अधूरा

साल 2018 के बजट भाषण के कुछ वायदे पूरे नहीं हो सके हैं। पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को न स्मार्ट स्कूल वर्दी मिली, न ही बैग और लैपटॉप। अफसरों की कारगुजारी के चलते मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं फाइलों तक सिमट कर रह गई हैं। शिक्षकों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की घोषणा पर कुछ काम हुआ, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से योजना अधर में फंस गई।

अखंड शिक्षा ज्योति योजना के सहारे इनरोलमेंट बढ़ाने की तैयारी
सरकारी स्कूलों से पढ़कर गौरवमयी पदों पर पहुंचे विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए शुरू की गई ‘अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल से निकले मोती’ योजना से सरकार ने खूब वाहवाही लूटी है। देश के कई राज्य यह योजना शुरू करने की तैयारी में हैं। स्कूलों में महीने का आखिरी शनिवार बैग फ्री डे घोषित करना, मेधावियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए आर्थिक मदद देना सरकार की उपलब्धियों में शामिल रहा। इसके अलावा सरकार ने तीन हजार से अधिक प्री प्राइमरी स्कूल खोले हैं। सरकारी स्कूलों में इनरोलमेंट बढ़ाने को नर्सरी-केजी की कक्षाएं शुरू की गई हैं।

हिमाचल में सरकारी स्कूलों की स्थिति
प्राथमिक स्कूल : 10657
माध्यमिक स्कूल : 1996
उच्च/वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल : 2749
डिग्री कॉलेज : 118
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स्कूलों में सुधार को कड़े कदम उठाने की जरूरत

वीरेंद्र चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राजकीय अध्यापक संघ
सरकारी स्कूलों में सुधार लाने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। बेहतर परीक्षा परिणाम न देने वाले शिक्षकों की जवाबदेही अनिवार्य तौर पर तय करनी होगी। मात्र चेतावनी देकर छोड़ने के चलते बीते कुछ सालों से परिणाम लगातार घट रहे हैं।

नए शिक्षण संस्थान खोलने की जगह पहले से खुले स्कूलों को मजबूत करना होगा। साल भर होने वाले शिक्षकों के तबादलों को साल में सिर्फ एक माह की करना चाहिए। इससे पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य लेने की प्रथा को भी कम करना होगा।

प्राथमिक स्कूलों में कम से कम पांच अध्यापक नियुक्त होने चाहिए। स्कूलों में शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य नहीं लेने चाहिए। न्यू पेंशन स्कीम के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम में लाने तथा पीटीए, पैट, पैरा और आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी बनाने के लिए भी बजट में प्रावधान किया जाए। - संसार राणा, प्रवक्ता अर्थशास्त्र

शिक्षकों के रिक्त पदों पर हो नियमित भर्ती
सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने को खाली पदों को नियमित भर्तियों से भरा जाए। स्कूलों में भवन, अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए बजट प्रावधान हो। सरकार छठे वेतन आयोग को केंद्र द्वारा लागू सातवें वेतन आयोग के आधार पर लागू करने को बजट प्रावधान करे। 4-9-14 टाइम स्केल 2009 के वास्तविक नियम से लागू होना चाहिए।- वीरेंद्र चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राजकीय अध्यापक संघ

कंप्यूटर शिक्षा की न वसूली जाए फीस
सभी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में अध्यापक आवास की सुविधा दी जाए। अध्यापकों को गुणात्मक शिक्षा देने के लिए सरकार की ओर से टैबलेट दिए जाएं। नवीं से जमा दो कक्षा तक मुफ्त कंप्यूटर शिक्षा दी जाए, ताकि गरीब बच्चे कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर सकें। माध्यमिक स्कूलों में सृजित पदों को समाप्त न किया जाए, जब तक उचित विकल्प न हो। - चमन लाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष सीएंडवी अध्यापक संघ

पहली से अनिवार्य हो इंग्लिश मीडियम
सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम को पहली कक्षा से ही शुरू करना चाहिए। शिक्षक भर्ती सिर्फ लोकसेवा आयोग या कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से होनी चाहिए। साल भर शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगनी चाहिए। स्कूलों में सभी मूलभूत सुविधाएं देने के लिए बजट में विशेष प्रावधान होना चाहिए। खेल मैदान विकसित करने पर भी फोकस होना चाहिए। - जीवन शर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षा उपनिदेशक
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