कोटखाई में एक छात्रा से दुराचार और हत्या के मामले में सरकार घिरती दिख रही है। जघन्य मामले में पुलिस चार दिन बाद भी खाली हाथ है, जिससे सियासी दलों के साथ सामाजिक संगठनों ने चौतरफा हमला बोल दिया है।
विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते एक और जहां मामले पर सियासी रंग चढ़ने लगा है जबकि दूसरी तरफ सामाजिक संगठन के धरने प्रदर्शनों ने कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
इस आपराधिक वारदात को जिस तरह से क्षेत्र में दम तोड़ती मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है उससे सरकार की दिक्कतें और बढ़ सकती है। मंडी में फारेस्ट गार्ड होशियार सिंह के मौत पर उठे सवाल अभी शांत नहीं हुए कि सरकार शिमला के कोटखाई में किशोरी के साथ दुराचार के बाद हत्या के मामले पर फिर कटघरे में है।
दो दिन तक लापता रहने के बाद किशोरी का शव मिलने पर भड़का जनाक्रोष राजधानी तक पहुंच गया है। आमतौर पर शांत रहने वाले पर्वतीय क्षेत्रों में जघन्य वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में जुटी पुलिस का रवैया लोगों के गुस्से को और भड़का रहा है। सरकार के स्तर से मामले में लगातार अपडेट ली जा रही है,
लेकिन मामले में अभी तक गिरफ्तारी नहीं होने से जनता प्रदर्शन से हटने को तैयार नहीं। स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन सिर्फ दरिंदों की गिरफ्तारी ही नहीं बल्कि क्षेत्र में हाई स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध करवाने की मांग कर रहे हैं।
सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों के प्रदर्शन के साथ भाजपा भी इस मामले में हमलावर हो गई है। कानून व्यवस्था के मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रही भाजपा अब खुलकर मोर्चे पर आ गई है। पार्टी के स्थानीय नेता लगातार पीड़ित परिवार से संपर्क में है।