उन्होंने कहा कि संस्थान लाभ देने वाली किस्मों के संरक्षण के लिए सराहनीय प्रयास कर रहा है और 20 पेटेंट हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ा है। राज्यपाल ने विशेष आलू उत्पाद क्षेत्रों की पहचान, आयात निर्यात क्षेत्रों की स्थापना, देश-विदेश में आलू के लिए बाजार खोजने और अन्य सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देकर उन्हें आपस में जोड़ने की दिशा में कार्य करने की सलाह दी। राज्यपाल ने संस्थान की वर्ष 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट भी जारी की और अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए अधिकारियों को सम्मानित किया।
सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने विज्ञानियों से आलू की अच्छी पैदावार वाली किस्मों का विकास करने का आग्रह किया। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि आय को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक शोध का भरपूर लाभ उठाने का भी आग्रह किया। इस अवसर पर महापौर कुसुम सदरेट, नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंद्र कौशल, निदेशक डॉ. एसके चक्रवर्ती, डॉ. एनके पांडे सहित कई अन्य मौजूद रहे। राज्यपाल ने कहा कि चीन के बाद भारत आलू उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है।
इसमें सीपीआरआई के शोध कार्य व आधुनिक तकनीकों के विकास की प्रमुख भूमिका है। भारतीय आलू को नई ऊंचाइयों तक ले जाने, उत्पादन में संतुलन बनाए रखने, आलू के उत्पाद को 8 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने, आलू के निर्यात को एक प्रतिशत से अधिक करने, उत्पाद के बाद के होने वाले नुकसान को 16 प्रतिशत तक घटाने जैसी चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता है।