हिमाचल पावर कॉरपोरेशन को बिजली बोर्ड में मर्ज किया जा सकता है। कॉरपोरेशन के कामकाज से नाराज ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि बीते दस साल में कॉरपोरेशन को दिए कई प्रोजेक्टों की अभी डीपीआर तक नहीं बनी है।
ऐसे में सरकार इन प्रोजेक्टों को वापस लेने पर विचार कर रही है। इन्हें एनएचपीसी या एसजेवीएन को सौंपा जा सकता है। कई प्रोजेक्ट अभी कमीशन की स्टेज पर भी नहीं पहुंचे हैं। सरकार कॉरपोरेशन के कामकाज की समीक्षा कर जल्द बड़ा फैसला लेगी।
सरकार नया सिस्टम तैयार करने पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2006 में कंपनी एक्ट 1956 के तहत हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन का गठन हुआ था।
बिजली उत्पादन की योजना बनाने, इसे प्रोत्साहित करने और व्यवस्थित करने का जिम्मा कॉरपोरेशन को सौंपा था, जिसमें हजारों कर्मचारी काम कर रहे हैं। कॉरपोरेशन को सरकार ने 3156 मेगावाट क्षमता के 22 हाइड्रो प्रोजेक्ट आवंटित किए हैं।