हिमाचल में पीजी करने वाले चिकित्सकों को सेवाएं देने के लिए शपथ पत्र देना होगा। चिकित्सकों को बाहरी राज्यों में सेवाएं देने से रोकने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। जब भी चिकित्सक पीजी करने को आवेदन करेंगे, उसी समय शपथ लिया जाएगा।
हिमाचल से 73 डॉक्टर बांड तोड़कर बाहरी राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से 13 डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमे और चार डॉक्टरों को वापस हिमाचल में सेवाएं देने की हामी भरी है। बाहरी राज्यों में निजी अस्पतालों की अपेक्षा हिमाचल में डॉक्टरों का वेतन कम है। चिकित्सक अच्छी खासी कमाई के लिए बाहरी राज्यों में सेवाएं देने जाते हैं।
यही नहीं कई चिकित्सकों ने दूसरे राज्यों में क्लीनिक तक खोल रखे हैं। सरकार का मानना है कि पीजी करने वाले एक चिकित्सक पर 10 लाख से ज्यादा खर्चा आता है। बावजूद बांड तोड़कर बाहरी राज्यों में सेवाएं देने चले जाते हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने कहा कि बांड तोड़ने वाले डाक्टरों पर कार्रवाई की जा रही है।
जब से सख्ती की है, चिकित्सक बाहरी राज्यों में सेवाएं देने का विचार छोड़ रहे हैं। कुछ चिकित्सकों ने बांड मनी जमा करवाई है। कइयों ने वापस हिमाचल में सेवाएं देेने की हामी भरी है। अब चिकित्सकों से शपथ पत्र लिए जाएंगे।
- विपिन सिंह परमार, स्वास्थ्य मंत्री