प्रसिद्ध धार्मिक स्थल आनंदपुर साहिब से नैना देवी तक रज्जू मार्ग निर्माण की प्रस्तावना दोनों राज्यों के बीच समय-समय पर विचाराधीन रही है। इस संबंध में दोनों राज्यों के बीच दिनांक 26 जुलाई, 2012 को समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किया था।
इस समझौता ज्ञापन को 2013 में रद्द कर दिया था। निर्णय लिया कि टोबा से नैना देवी के मध्य रज्जू मार्ग का निर्माण किया जाए। टोबा से नैना देवी के मध्य रज्जू मार्ग निर्माण कोई भी निविदा प्राप्त नहीं हुई थी।
रज्जु मार्ग प्रोजेक्ट का पंजीकृत कार्यालय शिमला में होगा
दोनों सरकारों की समान भागीदारी होगी। दोनों राज्य सरकार 50-50 लाख देंगी। इस निदेशक मंडल में 10 निदेशक होंगे। दोनाें राज्य सरकारें 5-5 निदेशक मनोनीत करेंगी। इस परियोजना के पर्यवेक्षण, निगरानी और प्रचालन हेतु दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की अध्यक्षता में एक शीर्ष समिति का गठन किया जाएगा।
जोकि सर्वसम्मति से निर्णय लेगी। इस समिति में दोनों सरकारों के मुख्य सचिव के अलावा कई अफसरों को शामिल किया गया है। इस परियोजना की रियायत अवधि 40 साल की होगी, जिसमें निर्माण के तीन वर्ष शामिल नहीं है।