अब उत्तराखंड की तर्ज पर सूबे में वन निगम खनन से पैसे कमाएगा। वन निगम ने प्रदेश सरकार की मंजूरी के लिए नालों में खनन को मंजूरी देने का प्रपोजल भेजने की योजना बनाई है। इसका खुलासा वन निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने धर्मशाला में प्रेसवार्ता में किया।
उन्होंने कहा कि सूबे में वर्तमान समय में लगभग 300 नाले हैं, जिसमें से सिर्फ 110 नालों में उद्योग और खनन विभाग खनन कर रहा है। 190 नाले ऐसे हैं, जहां पर कोई खनन नहीं हो रहा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने जिस प्रकार वन निगम को खनन करने के लिए मंजूरी दी है, उसी प्रकार हिमाचल के नालों में भी खनन कर निगम पैसे कमाएगा। इसके अलावा ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए निगम काम कर रहा है।
धर्मशाला मंडल में तीन-चार नई ईको साइटें देखने पर विचार किया जा रहा है। जिससे निगम की आय में बढ़ोतरी हो सके। उन्होंने कहा कि 190 नालों में अधिकतर वन विभाग के क्षेत्र में आते हैं।
वन विभाग से मंजूरी लेने के लिए निजी कंपनियों को बड़ी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है, लेकिन निगम को आसानी से एनओसी मिल जाएगा। इसलिए निगम ने इन नालों में खनन को मंजूरी
देने के लिए प्रदेश सरकार और वन विभाग को प्रपोजल भेजी जाएगी। जिससे प्रदेश सरकार को रॉयल्टी के रूप में करोड़ों रुपये का राजस्व आएगा। इस मौके पर वन निगम के निदेशक नरेश चौहान भी मौजूद रहे।