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गायकी में नाम कमाने की चाह में छोड़ दी साइंस की पढ़ाई

Mon, 09 Dec 2019 02:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन चौधरी, अमर उजाला, धर्मशाला
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PIC - फोटो : अमर उजाला
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जिस गायकी के लिए घर वालों से लड़-झगड़ कर साइंस की पढ़ाई छोड़ी, उसी गायकी के दम पर आज लोगों के दिलों में जगह बना रहा है अजय भरमौरी। अपनी गायकी के शौक को पूरा करने के लिए धर्मशाला के एक कैफे में वेटर तक का काम करने से भी अजय ने कोई गुरेज नहीं किया। जमा एक और जमा दो की पढ़ाई अपने रिश्तेदारों के यहां विधानसभा क्षेत्र शाहपुर के चड़ी स्कूल से पूरी करने के बाद अजय भरमौरी ने धर्मशाला कॉलेज में बीएससी में प्रवेश लिया।

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करीब एक वर्ष तक पढ़ाई करने के बाद बॉटनी की प्राध्यापिका सविता ने अजय की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें संगीत के क्षेत्र में जाने की सलाह दी। प्राध्यापिका सविता की सलाह पर जिला चंबा के भरमौर के गांव भटाडा (सामऱा) के अजय भरमौरी आज संगीत की दुनिया में प्रवेश कर गए हैं। अजय अब तक लोक सुरधारा के तहत तीन गीतों को गा चुके हैं, जिन्हें लोगों ने काफी सराहा है।

अजय ने बताया कि उनका शुरू से संगीत की दुनिया में नाम कमाने की रुझान था, लेकिन घर वालों की जिद के आगे स्कूल और कॉलेज में साइंस की पढ़ाई पढ़नी पड़ी, लेकिन प्राध्यापिका सविता के मार्गदर्शन के बाद उन्होंने संगीत विषय में स्नातक कर ली है। पढ़ाई के साथ अजय ने अब तक लोक सुरधारा के तहत तीन गाने यू-ट्यूब पर लांच किए हैं।
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अजय के अनुसार उनका पहला लोक भजन भगवान इंद्रूनाग पर ‘धारा दूर हो मेरे नागा’ गाया था, जिसे दो लाख से भी अधिक लोगों ने देखा व सुना। उनका दूसरा गीत ‘लुटपुटणु देयेरा’ व अभी हाल ही में उन्होंने अपना तीसरा गीत ‘चिड़िए बोल बोल्यां हो’ यू-ट्यूब पर लांच किया है।

अजय भरमौरी ने बताया कि वह बचपन से ही संगीत के पारिवारिक माहौल में रहे हैं। उनकी माता घर पर पारंपरिक गीत गाती थीं। तभी से उनका भी लोक गीतों की ओर रुझान हुआ। वह अपनी लोक संस्कृति को बढ़ाएंगे। अजय भरमौरी ने बताया कि वह अब यू-ट्यूब पर गानों के साथ शिव नुआला और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं। 

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