पर्यटकों को हेलिकॉप्टर से चोलिंग रवाना करती सेना और आईटीबीपी की टीम।
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किन्नौर के सांगला में बाढ़ आने के बाद फंसे 118 लोगों और पर्यटकों को सेना के हेलिकाप्टर से वीरवार को रेस्क्यू किया गया। इन्हें सेना के बाढ़ राहत कैंप पहुंचाया गया, जहां से बसों के माध्यम से आगे भेजा गया। सेना के हेलिकाप्टर ने छह बार उड़ान भरी। उधर, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किन्नौर जिले का दौरा किया और राहत एवं बचाव अभियान के साथ आपदा की स्थिति का जायजा लिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपतहसील टापरी के चोलिंग में सेना के राहत शिविर का भी दौरा किया और सैलानियों का कुशलक्षेम पूछा। उन्होंने सांगला घाटी से 118 पर्यटकों को सफलतापूर्वक बचाने के लिए जिला प्रशासन और भारतीय सेना के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री का प्रावधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने लाहौल स्पीति जिला के चंद्रताल में फंसे पर्यटकों के बचाव अभियान को चलाने में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने टोंगटोंगचे में कंक्रीट की दीवार बनाने के भी निर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री को उपायुक्त किन्नौर तोरूल रवीश ने जिले में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और बहाली की स्थिति से अवगत करवाया।
बड़ा भंगाल को जाने वाले रास्ते में 18 लोग फंसे
कांगड़ा की सबसे दुर्गम पंचायत बड़ा भंगाल को जाने वाले रास्ते में 18 के करीब लोग फंसे हैं। ये लोग पलाचक से पनारटू तक पैदल रास्ता बंद होने से पलाचक के पास डेरा जमाकर रह रहे हैं। लोगों के पास राशन भी खत्म हो गया है।
मनाली में फंसे 400 से अधिक चालक-परिचालक
लेह-लद्दाख से लौट रहे 400 से अधिक ट्रक चालक-क्लीनर मनाली में फंस गए हैं। मनाली-लेह मार्ग और कुल्लू-मनाली नेशनल हाईवे बंद होने के कारण यह लोग आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। नौ जुलाई से ये लोग ट्रकों में ही रात गुजार रहे हैं। अब राशन भी खत्म होने को है। मनाली प्रशासन ने इनके खाने की व्यवस्था कर दी है।