हिमाचल प्रदेश में किसानों ने भले ही मोटा अनाज पैदा करना शुरू कर दिया है, लेकिन तैयार फसलों की विपणन व्यवस्था नहीं हो पाई है। प्रदेश के किसानों ने देश की बाजार मांग को देखते हुए प्रदेश में मोटे अनाज का उत्पादन करने के लिए कदम बढ़ाए हैं। अब फसल तैयार हैं। इसे राज्य से बाहर बेचने में दिक्कतें आने लगी हैं। कृषि के पायलट प्रोजेक्ट में ही किसानों को फसलें बेचने में संकट खड़ा हो रहा है। ऐसी स्थिति में हिमाचल में मोटे अनाज की पैदावार साल दर साल बढ़ती है तो किसानों को फसलें बेचने को बाजार तलाशने में अपना समय भी बरबाद करना पड़ेगा।
राज्य के बाहर बिना पैकिंग के नहीं बेच पा रहे मोटा अनाज
कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि किसानों ने प्रोजेक्ट के तहत मोटा अनाज पैदा करना शुरू किया है। अब किसानों के फसलें बाहरी राज्यों में बेचने की समस्या हो रही है। दूसरे राज्यों खासकर बड़े शहरों में मोटे अनाज की मांग ज्यादा होने के साथ फसलों के दाम भी अच्छे मिलते हैं। किसानों के समक्ष समस्या यह आ रही है कि राज्य के बाहर बिना पैकिंग के मोटा अनाज नहीं बेचा जा सकता। मोटे अनाज की पैकिंग के लिए कई तरह की औपचारिकताएं जरूरी है और यह छोटे किसान नहीं कर पाते।
सरकार ने पांच करोड़ की राशि से साल पहले चलाया प्रोजेक्ट
सरकार ने मोटे अनाज की पैदावार को बढ़ाने के लिए पांच करोड़ का पायलट प्रोजेक्ट एक साल पहले आरंभ किया था। इससे उन जिलों को जोड़ा गया था, जहां किसान मोटा अनाज पैदा करते थे और इसे छोड़ चुके थे। इस प्रोजेक्ट से कोदा, लाल चावल, चीणी, फांफरा और मक्का आदि पैदा कर रहे हैं।
क्या कहते हैं कृषि सचिव
राज्य के कृषि सचिव राकेश कंवर कहते हैं कि प्रदेश के किसान मोटे अनाज की पैदावार कर रहे हैं, लेकिन वह अपने स्तर पर राज्य से बाहर नहीं बेच पा रहे हैं। राज्य में मोटा अनाज बेचने में किसानों को कई दिक्कत नहीं है। अगर राज्य से बाहर मोटा अनाज बेचना है तो पैकिंग की औपचारिकताएं पूरी करके ही बेच सकते हैं। इसके लिए किसी एजेंसी की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है।