नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि नए जीएसटी बिल में 1200 आइटमों में टैक्स लगाने की दरें तय की गई हैं। इनके अलावा रोजाना इस्तेमाल होने वाली सात फीसदी आइटम में कोई टैक्स नहीं होगा। 14 प्रतिशत आइटम न्यूनतम ब्रेकेट में हैं और इनमें जीएसटी की सबसे कम दर केवल चार फीसदी ही होगी।
रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसी चीनी, चाय, कॉफी, खाद्य तेल, जीवनरक्षक दवाओं आदि पर कम से कम टैक्स होगा। दही और दूध को भी इससे मुक्त रखा गया है। टैक्स का भुगतान भी इलेक्ट्रानिक विधि अथवा इंटरनेट से होगा। धूमल ने कहा कि जीएसटी भुगतान क्रेडिट कार्ड, आरटीजीएस और नेफ्ट से भी हो सकता है। टैक्स भुगतान करने के सभी चालान ऑनलाइन होंगे। मतलब ये भी होगा कि इससे केवल चीजें ही सस्ती नहीं होंगी, बल्कि भ्रष्टाचार भी खत्म होगा।
धूमल ने शनिवार को जीएसटी बिल पर अपना वक्तव्य देते हुए सदन में कहा कि जब सब कुछ ऑनलाइन ही होगा तो उपभोक्ता और उत्पादक को टैक्स विभाग के अधिकारियों से सीधे बात करने की जरूरत नहीं होगी। सारा काम ऑनलाइन ही होगा। इसका अर्थ ये होगा कि ये कानून कंज्यूमर फ्रेंडली होगा। करदाता का पंजीकरण भी ऑनलाइन होगा। धूमल ने कहा कि तीन दिन में उसे ऑनलाइन स्वीकृति मिलेगी और कोई आपत्ति भी नहीं होगी।
जो सेल्फ असेसमेंट का सिस्टम था, उसको और ब्रॉडवेज कर दिया गया है। जो एसेसी है या जो टैक्सदाता है, वह अपने टैक्स का मूल्यांकन खुद करेगा। वह असेसमेंट के हिसाब से ही सरकार के खाते में पैसा जमा करवाएगा। छोटे व्यापारी इसका लाभ लेंगे। पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष श्रेणी स्टेटस में 10 लाख तक की टर्न ओवर वाले वाले जो लोग है उनको कोई रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी। न ही कोई टैक्स उन पर लगेगा।
1200 वस्तुओं की श्रेणियां
7 प्रतिशत वस्तुएं जीएसटी से बाहर, दैनिक इस्तेमाल की वस्तुएं जैसे गेहूं, बटर, दूध, चावल आदि
14 प्रतिशत वस्तुओं पर 5 प्रतिशत जीएसटी, पैकिंग वाला बटर व दूध, फ्रोजन फूड, पनीर, शहद आदि
17 फीसदी आइटम्स का रेट मात्र 12 प्रतिशत होगा, जिसमें ड्राई फ्रूटस आदि शामिल हैं
43 प्रतिशत वस्तुओं पर रेट 18 प्रतिशत होगा, जिसमें रिफाइनड शूगर, सुरक्षित सब्जी और फल आदि शामिल हैं
19 फीसदी आइटम्स ऐसी आइटम्स का 28 फीसदी टैक्स लगेगा सिगरेट, तंबाकू, कोल्ड ड्रिंक, मार्बल, आदि
14 प्रतिशत बढ़ेगा प्रदेश का राजस्व, कम बढ़ा तो केंद्र करेगा भरपाई
धूमल ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स कंपेनसेशन टू स्टेटस एक्ट 2017 भी पास किया गया है। इसके माध्यम से पांच साल तक यदि किसी राज्य को नुकसान होता है तो उसकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी।
इसकी असेसमेंट के लिए बेस ईयर 2015-16 को माना जाएगा। इससे राज्य का राजस्व 14 प्रतिशत बढ़ेगा। यदि 14 प्रतिशत से कम आमदनी होगी तो उसकी मदद केंद्र सरकार की ओर से की जाएगा। हिमाचल एक उपभोक्ता राज्य है तो इसका यहां खूब लाभ होगा।