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Himachal: सबसे बड़ा सवाल, हिमाचल में कौन होगा मुख्यमंत्री, यहां जानें दावेदारों के नाम

Thu, 08 Dec 2022 08:05 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में कांग्रेस के दो खेमों की लड़ाई बढ़ेगी। हिमाचल में एक खेमा कांग्रेस की प्रचार समिति के प्रमुख सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में उभर चुका है। यहां पर कांग्रेस का दूसरा खेमा वह है, जिसका केंद्र बिंदु ‘हॉलीलॉज’ है।
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प्रतिभा सिंह और सुखविंद्र सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीत तो हासिल कर ली है, मगर सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि मुख्यमंत्री कौन होगा। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में कांग्रेस के दो खेमों की लड़ाई बढ़ेगी। हिमाचल में एक खेमा कांग्रेस की प्रचार समिति के प्रमुख सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में उभर चुका है। यहां पर कांग्रेस का दूसरा खेमा वह है, जिसका केंद्र बिंदु ‘हॉलीलॉज’ है। हॉली लॉज पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह का आवास है, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह खुद मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में खड़ी हो चुकी हैं। 

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कांग्रेस ने इस चुनाव में लगातार छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के देहांत के बाद उनके प्रति सांत्वना को भुनाने का पूरा प्रयास किया। प्रतिभा सिंह को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ही नहीं बनाया, बल्कि उनका नया नामकरण प्रतिभा वीरभद्र सिंह के रूप में किया। प्रतिभा वीरभद्र सिंह ने मंडी का लोकसभा चुनाव भी इसी नाम के साथ लड़ा था। उस समय मेें भी उपचुनाव में कांग्रेस ने न केवल यहां बल्कि तीन विधानसभा क्षेत्रों में भी जीत हासिल की। अब प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हॉली लॉज के समर्थक विधायक एकजुट होने लग गए हैं। एक प्रमुख खेमा वह है जो हॉलीलॉज के विरोध में रहता आया है। इस खेमे के प्रमुख नेता सुखविंद्र सिंह सुक्खू हैं, जो छह साल पार्टी प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी अध्यक्ष रहते हुए उनके वीरभद्र सिंह से संबंध ठीक नहीं रहे हैं। वह भी समुदाय से राजपूत हैं। वहीं, मुख्यमंत्री पद के तीन दावेदार कौल सिंह ठाकुर, आशा कुमारी और रामलाल ठाकुर अपना चुनाव ही हार गए। 

मुकेश, चंद्रकुमार, राठौर, शांडिल जैसे बड़े नेता भी रेस में 
मुख्यमंत्री पद की इस रेस में सुक्खू, प्रतिभा के अलावा मुकेश अग्निहोत्री, चंद्र कुमार, कुलदीप सिंह राठौर जैसे नेता भी हो सकते हैं। अगर प्रतिभा और सुक्खू खेमे में ज्यादा विवाद बढ़ गया तो विकल्प के रूप में इन नेताओं के नाम भी हो सकते हैं। मुकेश अग्निहोत्री कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे हैं और वीरभद्र के करीबी रहे हैं। वह ऊना से हैं और ब्राह्मण हैं। चंद्र कुमार वीरभद्र सरकार में वन मंत्री रह चुके हैं। वह चौधरी समुदाय से हैं और ओबीसी हैं। वह हॉलीलॉज के विश्वासपात्र हैं और कांगड़ा जिले से हैं। कुलदीप सिंह राठौर शिमला जिला से हैं और उपचुनाव में चारों सीटों पर अध्यक्ष रहते जीत दिलाने के लिए वह हाईकमान का भरोसा जीत चुके हैं और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। धनीराम शांडिल पूर्व में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य रह चुके हैं। वह अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं। 
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चुनाव ही हार गए सीएम पद के तीन दावेदार 
 मुख्यमंत्री पद के तीन दावेदार कौल सिंह ठाकुर, आशा कुमारी और रामलाल ठाकुर अपना चुनाव ही हार गए। कौल सिंह ठाकुर आठ बार विधायक रह चुके हैं, पर वह लगातार दूसरा चुनाव हार गए। वह तो दस साल पहले वीरभद्र सिंह के समानांतर भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में रह चुके हैं। आशा कुमारी को कांग्रेस की पंजाब में प्रभारी तक रह चुकी हैं और उनके प्रभारी रहते वहां अमरिंदर सरकार बनी थी। रामलाल ठाकुर भी हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं। वह वीरभद्र कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं।

वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश चुनाव प्रचार कमेटी के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 2003 में  पहला चुनाव लड़ा और विजयी हुए। 2007 में फिर जीते। 2012 का चुनाव हारे। 2017 के विस चुनाव में फिर सता में वापसी की। 2022 के विस चुनावों में चौथी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे। सुखविंद्र सिंह सुक्खू 2013 में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बने थे। उनकी संगठन में अच्छी पकड़ मानी जाती है। 

प्रतिभा सिंह 1998 में सक्रिय राजनीति में आई थीं। पहला चुनाव मंडी संसदीय क्षेत्र से लड़ा था, जब भाजपा के महेश्वर सिंह ने उन्हें करीब सवा लाख मतों से पराजित किया था। 1999 में लोकसभा का दोबारा चुनाव हुआ था। प्रतिभा सिंह ने यह चुनाव नहीं लड़ा था। 2004 के आम लोकसभा चुनाव में उन्होंने दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाई थी। समधी महेश्वर सिंह से 1998 की हार का बदला लेकर वह पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुईं। थीं। 2009 का लोकसभा चुनाव उनके पति पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने लड़ा था।  2012 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह ने लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया था। 2013 में उपचुनाव हुआ तो प्रतिभा तीसरी बार मैदान में उतरीं।

वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को करीब 1.39 लाख मतों से शिकस्त देकर दूसरी बार संसद सदस्य निर्वाचित हुई थीं। इसके साल भर बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुआ था। मोदी लहर में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने उन्हें 39 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। प्रदेश में उस समय कांग्रेस सरकार थी। प्रतिभा सिंह की हार से सब दंग रह गए थे। 2021 में करीब सात साल बाद प्रतिभा सिंह दोबारा चुनावी अखाड़े में उतरीं और जीत दर्ज की। 26 अप्रैल 2022 को हाईकमान ने प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश कांग्रेस का 32वां अध्यक्ष बनाया। मंडी उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को चारों खाने चित करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी सांसद प्रतिभा सिंह के सहारे पार्टी हाईकमान ने सत्ता में वापसी की योजना बनाई।  उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा गया। ऐसे में प्रतिभा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप राठौर जनवरी 2019 में कुलदीप राठौर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बने थे। बीते साल हुए पालमपुर और सोलन नगर निगम सहित मंडी संसदीय सीट के अलावा फतेहपुर, अर्की और जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने राठौर की अगुवाई में ही जीत दर्ज की थी। कांग्रेस हाईकमान ने इन जीत का पुरस्कार देते हुए राठौर को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है। इस विधानसभा चुनाव में उन्हें ठियोग सीट से उतारा गया। कांगड़ा जिले की जवाली सीट से कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र कुमार पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री रहे है। वह वीरभद्र सिंह के करीबी रहे हैं। वीरभद्र सरकार में वन मंत्री भी रहे। मुकेश अग्निहोत्री नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। उन्होंने ऊना जिले के हरोली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा है। 

वीरभद्र की विरासत को नहीं किया जा सकता नजरअंदाज : प्रतिभा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह की विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मुख्यमंत्री का फैसला विधायकों की सहमति पर ही हाईकमान लेगा। सभी विधायकों को बैठक के लिए चंडीगढ़ बुलाया गया है। उन्होंने प्रदेश में कांग्रेस को मिली जीत का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री के विकास मॉडल को दिया।

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