ये नहीं दिला पाए लीड
विस क्षेत्र जयसिंहपुर से आयुष एवं खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा के बूथ नंबर 8 परनोह से भाजपा को 189 तो कांग्रेस को महज 93 वोट मिले। बैजनाथ से सीपीएस किशोरी लाल के बूथ नंबर 78 से कांग्रेस को 258 तो भाजपा को 333 वोट पड़े। नगरोटा बगवां से कांग्रेस विधायक कैबिनेट रैंक प्राप्त रघुवीर सिंह बाली के बूथ नंबर 43 ठारु से कांग्रेस प्रत्याशी को 240 तो भाजपा को 354 वोट मिले। शाहपुर से विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया के बूथ नंबर 73 से कांग्रेस प्रत्याशी को 251 तो भाजपा को 281 वोट पड़े। ज्वालामुखी से विधायक संजय रतन के बूथ नंबर 45 पर कांग्रेस को 351, भाजपा को 499 वोट मिले। इंदौरा के विधायक मलेंद्र राजन के बूथ से आनंद को 361, भाजपा को 427 मत मिले।
भाजपा के इन विधायकों के बूथों से कांग्रेस प्रत्याशी को मिली कम लीड
विधानसभा क्षेत्र नूरपुर से भाजपा विधायक रणवीर सिंह निक्का के बूथ नंबर 89 से भाजपा प्रत्याशी को 622 तो कांग्रेस को 192 वोट मिले। विस क्षेत्र सुलह से पूर्व विस अध्यक्ष विपिन सिंह परमार के बूथ नंबर 27 पर कांग्रेस को 115 तो भाजपा को 398 मत मिले। कांगड़ा से भाजपा विधायक पवन काजल के बूथ नंबर 52 सहौड़ा से भाजपा प्रत्याशी को 346 और कांग्रेस को 159 वोट मिले। राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी के बूथ नंबर 37 से भाजपा को 240 तो कांग्रेस प्रत्याशी को 141 वोट मिले। धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के बूथ नंबर 69 रक्कड़ से कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शर्मा को 289 तो भाजपा के राजीव भारद्वाज को 590 वोट मिले। भाजपा के सभी विधायक अपने बूथों के अलावा कांग्रेस विधायकों के बूथों पर भी सेंध लगाने में कामयाब रहे।
लीड दिलाने में नाकाम रहे नेता अब नहीं मांग सकेंगे पद
लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद निगमों-बोर्डों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की दौड़ में रहे कांग्रेस विधायक, पूर्व विधायक और अन्य नेता इन पदों के लिए आवाज नहीं उठा सकेंगे। चुनाव से पहले संगठन ने सभी को अपने-अपने क्षेत्र से लीड दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। संगठन ने कहा था कि अच्छी लीड दिलाने पर सरकार में जगह दी जाएगी, लेकिन चुनाव में मंत्री और विधायक और नेताओं की परफोरमेंस ठीक नहीं रही है। ऐसे में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए सरकार पर दबाव नहीं बना सकेंगे। सरकार के निगमों-बोर्डों के अध्यक्ष -उपाध्यक्ष के पद खाली चल रहे हैं।
सिविल सप्लाई, परिवहन निगम और एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन सहित दो दर्जन निगम बोर्डों में नेताओं ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के लिए इच्छा जताई थी। हालांकि, पूर्व भाजपा सरकार ने निगम और बोर्डों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की फौज खड़ी की थी। उस समय विस चुनाव में हारे नेताओं को भी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनाया गया था। सरकार में इनकी संख्या 30 से अधिक थी। हालांकि, अध्यक्षों-उपाध्यक्षों की तैनाती से सरकार पर और करोड़ों का खर्चा बढ़ेगा। गाड़ियों से लेकर आवास तक का खर्चा सरकार को वहन करना पड़ेगा। फिर भी निगम-बोर्डों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की तैनाती करने की योजना बना रही है।