महेंद्र खुद चुनाव लड़ने के लिए 21 अक्तूबर को नामांकन भरने की तैयारी कर चुके थे। पिता की राजनीतिक विरासत को बेटी वंदना संभालना चाह रही थीं, लेकिन भाई को टिकट मिला तो वंदना ने तो सोशल मीडिया पर यह तक लिख डाला कि दिल्ली से टिकट तो आ सकते हैं, वोट नहीं। हर बार परिवारवाद में बेटियों की बलि क्यों दी जाती है। उधर, सोलन में कांग्रेस विधायक कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल के खिलाफ उनके दामाद डॉ. राजेश कश्यप बतौर भाजपा प्रत्याशी चुनाव रण में उतर चुके हैं। वर्ष 2017 में भी इन दोनों में मुकाबला हुआ था। इसमें ससुर धनीराम शांडिल जीते थे।
बेटे को मनाने गए महेश्वर और उनकी पत्नी
मंडी लोकसभा सीट से भाजपा से सांसद रह चुके पूर्व विधायक महेश्वर सिंह के बेटे हितेश्वर सिंह बंजार से भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। हितेश्वर के समर्थक बुधवार को सैंज में निर्दलीय चुनाव लड़ने की रणनीति बनाते रहे तो इस पर खुद महेश्वर सिंह और उनकी पत्नी विभा सिंह बेटे से मान-मनौव्वल करने वहां पहुंच गए। महेश्वर सिंह खुद कुल्लू से भाजपा से टिकट के तलबगार हैं।