रवि ठाकुर, डॉ. रामलाल मारकंडा।
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विधानसभा चुनाव के लिए हुए मतदान के बाद शीत मरुस्थल लाहौल-स्पीति में सियासत गरमा गई है। भुंतर स्थित जनजातीय भवन में मतगणना के बाद उम्मीदवारों के भाग्य का पिटारा खुलेगा। लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र में इस बार कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर रही है, लेकिन आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार वोट बैंक में सेंध लगाकर राजनीतिक समीकरण बिगाड़ रहे हैं। वर्ष 1998 के बाद इस विधानसभा क्षेत्र से कोई नेता लगातार दूसरी जीत दर्ज नहीं कर पाया है। लाहौल-स्पीति में देवी सिंह ठाकुर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बाजी मारी थी। वर्ष 1967 में वह बतौर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे और जीतकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि, इसके बाद वह जनता दल से भी चुनाव जीत चुके हैं।
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लाहौल-स्पीति में मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा के लिए चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है तो कांग्रेस के रवि ठाकुर वापसी के लिए बेताब हैं। 24,744 मतदाताओं वाली लाहौल-स्पीति विधानसभा दो अलग-अलग भागों में बंटा हुआ है। कुंजम दर्रा के उस पार स्पीति घाटी है तो इस ओर लाहौल घाटी। क्षेत्रफल अधिक होने और आबादी वाले इलाके दूर-दूर होने के कारण चुनाव प्रचार करना भी चुनौती से कम नहीं, लेकिन, सभी उम्मीदवारों ने खराब मौसम के बावजूद प्रचार अभियान जारी रखा और एक-एक गांव तक पहुंचे। लाहौल-स्पीति के राजनीतिक इतिहास को लें तो यहां वर्ष 1998 के बाद कोई भी विधायक रिपीट नहीं हुआ। पिछले 25 वर्षों में यहां कोई भी विधायक दोबारा जीत दर्ज नहीं कर पाया।
देवी सिंह ठाकुर जीते थे निर्दलीय चुनाव
लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र में देवी सिंह ठाकुर एक मात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था। 1967 में देवी सिंह लाहौल-स्पीति से चुनाव जीते थे। वर्ष 1998 में लाहौल-स्पीति में भाजपा के रामलाल मारकंडा, 2003 में रघवीर ठाकुर, 2007 में रामलाल मारकंडा, 2012 में कांग्रेस के रवि ठाकुर यहां से विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2017 में भाजपा के रामलाल मारकंडा ने फिर यहां से जीत हासिल की। इससे पहले 1990 और 1992 में कांग्रेस के फुंचोग राय ने इस सीट पर जीत दर्ज की। 1977 से 1985 तक देवी सिंह ठाकुर लगातार इस सीट पर विधायक बने, जबकि 1972 में यहां कांग्रेस की लता ठाकुर विजयी हुई।
73.75 प्रतिशत रहा लाहौल में मतदान
जनजातीय जिला में 12 नवंबर को 73.75 फीसदी मतदान हुआ है। विधानसभा क्षेत्र में कुल 92 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जिनमें 26 मतदान केंद्रों को वेबकास्टिंग से जोड़ा गया था। इसके अलावा मतदान केंद्रों में आवश्यक न्यूनतम सुविधाएं भी मतदाताओं को उपलब्ध करवाई गई थी। आदर्श मतदान केंद्र जाहलमा तथा विश्व के सबसे ऊंचे मतदान केंद्र टशीगंग में मतदाताओं का लाहौल की परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। टशीगंग में सौ फीसदी मतदान का रिकार्ड भी दर्ज हुआ।
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