कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र में राजपूत और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। कुल मतदाताओं में से करीब 33 फीसदी मतदाता आरक्षित श्रेणी से है 67 फीसदी अनारक्षित वर्ग के मतदाता है। यह हलका कांग्रेस का गढ़ रहा है और यहां से भाजपा को हमेशा मजबूत प्रत्याशी की दरकार रही है। साल 2012 से पहले कसुम्पटी विधानसभा आरक्षित सीट थी। उस समय भी कांग्रेस के सोहन लाल विधायक थे। हालांकि, भाजपा के रूपदास कश्यप भी चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे और मंत्री पद पाया। साल 2012 में सीट ओपन होने पर कांग्रेस के अनिरुद्ध सिंह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और भाजपा प्रत्याशी को हराया।
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यहां टिकट के लिए मारा मारी रही जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलता रहा। टिकट न मिलने से नाराज नेता घर बैठ जाते या अनमने ढ़ंग से चुनाव प्रचार करते। इसका नतीजा साल 2012 के चुनाव में देखने को मिला जिसमें बीजेपी प्रत्याशी कांग्रेस प्रत्याशी के मुकाबले आधे वोट भी नहीं ले पाए। हालांकि, इस बार भाजपा दावा कर रही है कि वरिष्ठ मंत्री को चुनाव में उतारने के बाद एकजुट होकर चुनाव लड़ा जा रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह के समर्थक भी जीते के लिए पूरी तरह आश्वस्त हैं।
दस साल में कसुम्पटी विधानसभा के अंदर किए गए विकासात्मक कार्यों को लेकर फिर से जनता के बीच हैं। कुल मिलाकर कसुम्पटी विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों कही बड़ी पार्टियां जीत के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। कांग्रेस जहां ओपीएस, महंगाई, बेरोजगारी आदि ज्वलंत मुद्दों को लेकर जनता के बीच में हैं तो वहीं भाजपा विकास के नाम पर वोट मांग रही है।
मतदान की स्थिति
वर्ष 2012 वर्ष 2017
कांग्रेस 16929 कांग्रेस 22061
भाजपा 7043 भाजपा 12664
निर्दलीय 6466 माकपा 4698
माकपा 4823 --
कुल मतदाता 66,722
पुरुष वोटर 34,442
महिला वोटर 32,280