हिमाचल में 1990 से चले आ रहे सियासी ट्रेंड को बरकरार रखते हुए के सूबे मतदाताओं ने कांग्रेस को सत्ता से हटाकर भाजपा को सत्तासीन कर दिया। कुल 68 सीटों वाली विधानसभा में इस बार भाजपा 44 सीटों पर काबिज हुई जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर ही सिमट कर रह गई।
मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी का एक प्रत्याशी इस बार विधानसभा पहुंच गया। बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी जैसे कई क्षेत्रीय व राष्ट्रीय दल अपना खाता खोलने में नाकामयाब रहे। 50 से ज्यादा सीटों पर काफी करीबी मुकाबला रहा। वहीं दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी जीत हासिल की।
इनमें देहरा से होशियार सिंह, जोगिंदर नगर से प्रकाश राणा शामिल हैं। भाजपा ने कांगड़ा, शिमला और मंडी में अच्छा प्रदर्शन कर बहुत से दस सीटें ज्यादा हासिल कर ली। हालांकि भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल अपनी ही सीट हा गए।
ये दिग्गज नहीं बचा पाए सीट
धूमल के समधी गुलाब सिंह ठाकुर, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि भी चुनाव हार गए। इसके अलावा कांग्रेस सरकार के कद्दावर मंत्रियों में एक परिवहन मंत्री जीएस बाली, शहरी विकास मंत्री सुधरी शर्मा, वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, आबकारी मंत्री प्रकाश चौधरी और कौल सिंह अपनी सीट नहीं बचा सके।
वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा धनीराम शांडिल, ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया और परिवहन मंत्री अपनी सीट बचाने में कामयाब हो गए। धूमल की हार के बाद भाजपा में अब प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
सबसे ज्यादा और कम मतों का अंतर
फिर तीन महिलाएं ही करेंगी आधी आबादी का नेतृत्व
पिछले विधानसभा चुनावों की ही तरह इस बार भी चुनावों में केवल तीन महिला प्रत्याशी ही जीत हासिल कर सकी। इनमें डलहऊजी से आशा कुमार की के अलावा शाहपुर से सरवीन चौधरी, इंदौरा से रीता धीमान जीत गई।
सबसे ज्यादा अंतर
मुल्खराज
भाजपा
बैजनाथ क्षेत्र
11,477
सबसे कम अंतर से जीत
जीएस बाली
कांग्रेस पार्टी
नगरोटा क्षेत्र
120
ये है सबसे बुजुर्ग विधायक
सबसे बुजुर्ग विधायक
वीरभद्र सिंह
कांग्रेस पार्टी
अर्की क्षेत्र
उम्र 83
सबसे युवा विधायक
विक्रमादित्य सिंह
कांग्रेस पार्टी
शिमला ग्रामीण क्षेत्र
उम्र 26