कोर्ट ने कहा कि उनके पास शिक्षा सचिव को निजी तौर पर तलब करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अब उन्हें खुद आकर बताना होगा कि आदेश के बावजूद हलफनामा क्यों नहीं दायर किया गया। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में कनिष्ठ कार्यालय सहायक (लाइब्रेरी) के पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने में हो रही देरी और राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। 15 मई 2023 को दिए गए निर्देशों के तहत 6 महीने के भीतर आरएंडपी नियम (भर्ती एवं पदोन्नति नियम) बनाकर खाली पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। राज्य सरकार की इस ढिलाई और पदों के लंबे समय से खाली रहने के कारण प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था लगातार बदतर हो रही है।
कुल 771 पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाना था, जिसमें से 235 खाली पदों को भरने की अनुमति सरकार की ओर से दी जा चुकी थी। वित्त विभाग ने 3 मई 2024 को शिक्षा विभाग में 400 जेएओ (लाइब्रेरी) पदों को भरने की मंजूरी दी थी। पहले चरण में 100 स्कूलों में नियुक्ति का फैसला हुआ और हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग को 78 पदों की मांग भेजी गई थी। 19 जुलाई 2025 को चयन आयोग ने यह मांग वापस लौटा दी कि इसे भर्ती निदेशालय के माध्यम से भेजा जाए। हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव के माध्यम से फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि भर्ती प्रक्रिया को उसके अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और अब तक यह काम क्यों नहीं पूरा हो पाया।
विशेष बच्चों के स्कूल में खाली पद भरने के सरकार को निर्देश
प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के नजदीक ढली स्थित विशेष बच्चों के स्कूल में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अस्मिता सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को स्कूल में खाली पड़े सभी पदों को तुरंत भरने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष 29 अक्तूबर 2023 के पत्र का हवाला दिया। इससे स्पष्ट हुआ कि स्कूल में ब्रेल इंस्ट्रक्टर और मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर के पद वर्ष 2006 और 2016 में स्वीकृत होने के बावजूद अभी तक खाली पड़े हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि इस विशेष शैक्षणिक संस्थान की विशिष्टता और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पदों का खाली रहना चिंताजनक है।
कुल 29 स्वीकृत पदों में से 10 पद रिक्त चल रहे हैं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ब्रेल और मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर के अलावा टीजीटी, पीजीटी इतिहास, वार्डन, कुक, डीपीई और अन्य इंस्ट्रक्टर (कला, नृत्य, योग और पीटी) के सभी रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। राज्य सरकार की ओर से दायर पिछले हलफनामे के अनुसार स्कूल के मौजूदा स्टाफ के अधिग्रहण की नियम और शर्तें प्रक्रियाधीन हैं। हाईकोर्ट ने सरकार के इस रुख के बीच बच्चों की पढ़ाई और व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। अदालत ने कहा कि इस तरह के विशेष शिक्षण संस्थानों की संवेदनशीलता को देखते हुए स्टाफ की कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।