मामला उन शिक्षकों से जुड़ा था, जिन्होंने दलील दी थी कि उनकी सेवा 3 जनवरी 2022 से पहले शुरू हो चुकी थी। ऐसे में संशोधित वेतन नियमों के तहत उन्हें दो वर्ष की नियमित सेवा पूरी होने पर उच्च वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर पूनम कुमारी व अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने पांच जनवरी 2026 को शिक्षा निदेशक को मामले की विस्तृत जांच कर स्पष्ट आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे। साथ ही मोहित शर्मा मामले में दिए गए पूर्व निर्णय को भी ध्यान में रखने को कहा था।
इसके बाद शिक्षा निदेशालय ने नियुक्ति और नियमितीकरण संबंधी रिकॉर्ड की जांच की। जांच में पाया गया कि याचिकाकर्ताओं का मामला मोहित शर्मा केस से मेल खाता है। इसी आधार पर उन्हें उच्च वेतनमान का लाभ देने का निर्णय लिया गया। निदेशालय ने सभी संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को नियमानुसार वेतन निर्धारण कर लाभ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिक्षकों से एक अंडरटेकिंग भी ली जाएगी, ताकि भविष्य में किसी स्तर पर अधिक भुगतान या न्यायिक स्थिति में बदलाव होने पर अतिरिक्त राशि की वसूली की जा सके।
एलपीए के अंतिम फैसले पर टिकी रहेगी आगे की स्थिति
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ मोहित शर्मा मामले में राज्य सरकार की ओर से दायर लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। यदि अपील में कोई अलग फैसला आता है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संदेह की स्थिति में निदेशालय भेजना होगा मामला
उप शिक्षा निदेशकों, प्रधानाचार्यों और डीडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि जिन मामलों में आदेश की पात्रता को लेकर कोई संदेह हो, उन्हें अपने स्तर पर निपटाने के बजाय पूरा रिकॉर्ड निदेशालय को भेजा जाए। वहीं पात्र मामलों में लाभ प्रदान कर अनुपालन रिपोर्ट शीघ्र भेजने को कहा गया है।