उन्होंने बताया कि मिश्र धातु पानी के संपर्क में आने पर हाईड्रोजन रिलीज करते हैं, जो मानव शरीर के लिए खतरनाक है। डॉ. विजय ठाकुर और उनके सहयोगी की रिसर्च ने हाईड्रोजन रिलीज होने की प्रक्रिया को रोकने में सफलता हासिल की है। इसमें शोधकर्ताओं ने सस्टेनेबल बायोबेस्ड मेंब्रेंस का नया प्रयोग किया है।
जिसके तहत बायोबेस्ड मेंब्रेंस 6 से 12 महीने के बाद खत्म हो जाते हैं और केवल एकीकृत धातु प्रत्यारोपण के साथ हड्डी ही रह जाती है। इस उपचार विधि से शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता कम कर उपचार खर्च में कमी की जा सकती है।
रिचर्स का चूहों पर सफलता से परीक्षण किया जा चुका है। जल्द ही इसका मानव शरीर पर भी उपयोग किया जाएगा। इस रिचर्स की विशेषता को देखते हुए अमेरिका, यूरोप और ब्रिटेन में व्यापक प्रचार शुरू हो गया है।