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Himachal: जानलेवा सड़कें... हादसों में हर दिन बुझ रहे चिराग; एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में खुलासा

Sun, 17 May 2026 12:03 PM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, शिमला।

सार

 नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024 (एडीएसआई-2024) रिपोर्ट ने राज्य में सड़क सुरक्षा की भयावह तस्वीर सामने रखी है। 
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सड़क हादसों में जान गंवा रहे लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देवभूमि हिमाचल की सर्पीली सड़कें लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024 (एडीएसआई-2024) रिपोर्ट ने राज्य में सड़क सुरक्षा की भयावह तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटनाओं के 2,158 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 864 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3,207 लोग घायल हुए। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में औसतन हर दिन दो से अधिक लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। वहीं कुल आकस्मिक मौतों का आंकड़ा 3,204 तक पहुंच गया है। इसका अर्थ है कि राज्य में हर दिन औसतन 8 से 9 लोगों की मौत किसी न किसी दुर्घटना में हो रही है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश में आकस्मिक मौतों की दर 42.6 प्रति लाख आबादी दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 33.3 प्रति लाख है। यह अंतर साफ संकेत देता है कि पहाड़ी राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर की तुलना में कहीं अधिक कमजोर और दयनीय स्थिति में है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां, संकरी सड़कें, तीखे मोड़, गहरी खाइयां और लगातार बढ़ता यातायात दुर्घटनाओं के जोखिम को कई गुना बढ़ा रहे हैं। मानसून और बर्फबारी के दौरान यह खतरा और भी गंभीर हो जाता है।

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एसयूवी, कार और जीप सबसे ज्यादा हादसों में शामिल

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल में सबसे अधिक मौतें एसयूवी, कार और जीप श्रेणी के वाहनों से जुड़े हादसों में हुईं। इन दुर्घटनाओं में 391 लोगों ने जान गंवाई। इसके बाद ट्रक, टेंपो और मिनी ट्रक हादसों में 81 लोगों की मौत दर्ज की गई। प्रदेश में निजी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन सड़कें चौड़ी करने, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा मानकों में उस अनुपात में सुधार नहीं हुआ है। पर्यटन सीजन में बाहरी वाहनों का दबाव भी हादसों की आशंका बढ़ा रहा है।

ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ा खतरा

राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 58 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं ओवरस्पीडिंग के कारण होती हैं। हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में तेज रफ्तार और भी घातक साबित होती है। कई मामलों में चालक तीखे मोड़ों पर नियंत्रण खो देते हैं और वाहन सीधे खाई में जा गिरते हैं। बताया गया है कि प्रदेश में कई ऐसे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग हैं जहां पर्याप्त चेतावनी संकेत, स्पीड कंट्रोल सिस्टम और क्रैश बैरियर तक उपलब्ध नहीं हैं।

ब्लैक स्पॉट्स और क्रैश बैरियर पर बड़ा सवाल

प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां हर साल बार-बार हादसे होते हैं। इसके बावजूद इन स्थानों पर न तो पर्याप्त क्रैश बैरियर लगे हैं और न ही सड़क चौड़ी की गई है। लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों द्वारा सड़क सुरक्षा ऑडिट की प्रक्रिया भी कई मामलों में धीमी पाई गई है। कई ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क किनारे पैराफिट, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्डों की कमी हादसों का बड़ा कारण बताई गई है।
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सरकार और विभागों के लिए चेतावनी

एनसीआरबी के ताजा आंकड़े राज्य सरकार, परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग के लिए गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर बनाई जा रही योजनाओं और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। यदि ब्लैक स्पॉट्स का तत्काल सुधार, टैफिक नियमों का सख्ती से पालन, ओवरस्पीडिंग पर कार्रवाई, आधुनिक क्रैश बैरियर, बेहतर साइन बोर्ड और वैज्ञानिक सड़क डिजाइन पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में हादसों और मौतों का ग्राफ और बढ़ सकता है।
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