देवभूमि हिमाचल की सर्पीली सड़कें लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024 (एडीएसआई-2024) रिपोर्ट ने राज्य में सड़क सुरक्षा की भयावह तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटनाओं के 2,158 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 864 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3,207 लोग घायल हुए। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में औसतन हर दिन दो से अधिक लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। वहीं कुल आकस्मिक मौतों का आंकड़ा 3,204 तक पहुंच गया है। इसका अर्थ है कि राज्य में हर दिन औसतन 8 से 9 लोगों की मौत किसी न किसी दुर्घटना में हो रही है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश में आकस्मिक मौतों की दर 42.6 प्रति लाख आबादी दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 33.3 प्रति लाख है। यह अंतर साफ संकेत देता है कि पहाड़ी राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर की तुलना में कहीं अधिक कमजोर और दयनीय स्थिति में है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां, संकरी सड़कें, तीखे मोड़, गहरी खाइयां और लगातार बढ़ता यातायात दुर्घटनाओं के जोखिम को कई गुना बढ़ा रहे हैं। मानसून और बर्फबारी के दौरान यह खतरा और भी गंभीर हो जाता है।