छत्तीसगढ़ के मख्यमंत्री भूपेश बघेल।
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छत्तीसगढ़ मॉडल से हिमाचल में कांग्रेस की चुनावी वैतरणी पार करने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता तक पहुंचने के लिए कांग्रेस लोगों को रोजगार देने और जनता को खासकर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की योजनाओं से वोटरों को लुभाने का कोई मौका नहीं चूकना चाहती। शिमला में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के मुख्य पर्यवेक्षक भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुई पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद एक बात साफ हो गई है कि जो रास्ता बघेल सरकार ने चुना है, उसे हिमाचल में भी अपनाने की कवायद की जा रही है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और प्रभारी राजीव शुक्ला भी छत्तीसगढ़ माडल के कायल हो चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस की आम बैठक में बघेल सरकार की जिस तरह से वह खूबियां गिना रहे थे, उससे साफ है कि वह भी छत्तीसगढ़ माडल को हिमाचल में लागू करने के पक्षधर हैं। छत्तीसगढ़ सरकार गो संरक्षण के साथ लोगों से गोबर और गौ मूत्र खरीदकर लोगों को कमाई करा रही है। इससे प्रदेश में लावारिस गौ और अन्य पशुओं के संरक्षण में भी मदद मिली है।
वहीं बघेल सरकार इससे खाद और अन्य सामग्री तैयार करके करोड़ों कमा रही है। किसानों को लुभाने के लिए धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपए क्विंटल देने का मुद्दा भी उठा। छत्तीसगढ़ में बीपीएल परिवारों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है। इस बार विधानसभा चुनाव में तीन सौ यूनिट घरेलू बिजली मुफ्त, बीस रुपए किलो सेब का समर्थन मूल्य, बेरोजगारों को स्वावलंबी बनाने को 680 करोड़ की व्यवस्था और गौ सरंक्षण जैसे मुद्दों को भुनाकर कांग्रेस को सत्ता पर काबिज करने की कोशिश जोरों पर है।