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कांग्रेस ने बदहाल कानून-व्यवस्था पर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

Fri, 04 May 2018 08:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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सुक्खू-अग्निहोत्री की अध्यक्षता में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा। कसौली गोलीकांड पर प्रदेश भर में सीएम जयराम ठाकुर के पुतले फूंकने के दूसरे दिन हिमाचल कांग्रेस ने राजभवन जाकर बदहाल कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर जयराम सरकार को घेरा है। 

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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री के नेतृत्व में पार्टी विधायकों, पूर्व मंत्री समेत कई नेताओं ने राजभवन जाकर राज्यपाल आचार्य देवव्रत को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कसौली गोलीकांड और पालमपुर गैंगरेप जैसे मामले उठाकर राज्यपाल से हस्तक्षेप कर प्रदेश सरकार को उचित कदम उठाने के दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। आम आदमी असुरक्षित महसूस कर रहा है। आए दिन प्रदेश में हत्या, दुष्कर्म, छेड़छाड़, शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न और अन्य संगीन अपराध के मामले दर्ज हो रहे हैं। अराजकता का माहौल है।
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खासकर महिलाएं खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रही हैं।  सत्तासीन भाजपा सरकार स्थितियों को नहीं संभाल पा रही है। लिहाजा, राज्यपाल हस्तक्षेप कर कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दें। 

ज्ञापन में उठाए ये बिंदु उठाए 

सुक्खू, अग्निहोत्री के अलावा प्रतिनिधिमंडल में विधायक रामलाल ठाकुर, जगत सिंह नेगी, हर्षवर्द्धन चौहान, विनय कुमार, लखविंदर राणा, विक्रमादित्य सिंह, आशीष बुटेल, पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, पूर्व संसदीय सचिव रोहित ठाकुर, कांग्रेस के प्रदेश महासचिव नरेश चौहान, प्रवक्ता संजय सिंह चौहान, कार्यकारिणी सदस्य महेंद्र चौहान, जिला अध्यक्ष शिमला ग्रामीण यशवंत छाजटा आदि मौजूद रहे। 

होटल मालिक के बेटे ने कसौली में महिला अधिकारी की हत्या की और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। आरोपी फरार, नहीं पकड़ा गया। कांगड़ा जिले के पालमपुर के परोर के जंगलों में नाबालिग छात्रा से गैंगरेप। तीन आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर। 

कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां में बारहवीं की छात्रा ने छेड़छाड़ से तंग आकर आत्मदाह किया।प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों के छात्राओं से यौन उत्पीड़न के मामले बढ़े। सरकारी और निजी संस्थानों में भी सुरक्षित नहीं छात्राएं।

अवैध निर्माण पर एक्शन प्लान बनाए सरकार : बाली

कसौली की घटना पूरी तरह से सिस्टम की नाकामी का कारण है। 150 के करीब पुलिस जवानों के होते हुए गोलीकांड का आरोपी फरार हो गया। किसी अधिकारी की गोली मारकर हत्या करने के मामले को लेकर देवभूमि की छवि भी पूरी तरह से धूमिल हुई है। यह बात पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने धर्मशाला में पत्रकारों से कही। 

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शुरुआती पांच माह में ही फेल हो चुकी है। होटलों के अवैध निर्माण पर उन्होंने कहा कि अगर सरकारी भवनों को नियमों के अनुसार बहुमंजिला बनाया जा सकता है तो अन्य भवन मालिकों को भी इसमें रियायत देनी चाहिए। प्रदेश सरकार को अधिकारियों-कर्मचारियों का दायित्व तय कर देना चाहिए।

बाली के अनुसार प्रदेश में अवैध निर्माण होना ही खतरनाक है। अवैध निर्माण को लेकर सरकार को एक एक्शन प्लान बनाकर लोगों के बारे में सोचना चाहिए। इसके बाद नो रिटेंशन पॉलिसी लाकर कभी भी राहत नहीं देनी चाहिए।  उन्होंने परिवहन मंत्री के कांग्रेस कार्यकाल में ज्यादा बसें खरीदने के बयान पर तंज कसा।

उन्होंने ढांगू वाया पठानकोट रूट पर परमिट देने को नया कारनामा बताया। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी आगामी स्टेशन को वाया करके दर्शाया गया है। लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर बाली ने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जो भी तय करेगी, वह मंजूर होगा। सुक्खू अपना काम बेहतर तरीके से कर रहे हैं।
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अवैध कब्जों पर सख्त कानून बनाए सरकार : शांता

सोलन के कसौली में गोली चलने से हुई महिला अधिकारी की मौत को सांसद शांता कुमार ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। कसौली में अतिक्रमण को हटाते हुए एक सरकारी अधिकारी पर गोली चलाने की घटना प्रदेश के इतिहास में पहली है। इस घटना से पूरे प्रदेश में भय का वातावरण बन गया है।  

सांसद शांता कुमार ने मुख्यमंत्री से विशेष आग्रह किया है कि यदि आवश्यकता हो तो सरकार एक विशेष कानून बनाए। इसमें सरकारी संपत्ति पर होने वाले किसी भी गैर कानूनी कब्जे के लिए स्थानीय कर्मचारी व अधिकारी को दोषी ठहराया जाए और उसे कठोर सजा दी जाए। प्रदेश में कानून का राज्य स्थापित करने के लिए यह अत्यंत जरूरी है।

उन्होंने सरकारी कर्तव्य को निभाने वाली शैलबाला के निधन पर उनके पूरे परिवार से सहानुभूति प्रकट की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में और देश में भी इस प्रकार की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण बहुत अधिक हुए हैं। जब सर्वोच्च न्यायालय तक मामला पहुंचता है तो उस अतिक्रमण को जल्द हटाने का आदेश होता है।

करोड़ों की संपत्ति नष्ट हो जाती है। इससे कुछ निर्दोष लोगों को भी बहुत हानि होती है। यह अति दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई लोग सरकार की संपत्ति को लावारिस समझ कर कब्जा कर लेते हैं। लेकिन, सबसे बड़े दोषी तो वे कर्मचारी और अधिकारी हैं जो आंखें बंद कर बिकते हैं और ऐसा गैर कानूनी काम करने देते हैं। लिहाजा, सबसे पहले उन सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए। 
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