फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस का कल्चर बनी गुटबाजी चरम पर, कैसे खोलेंगे लोकसभा चुनाव में खाता

Fri, 18 Jan 2019 10:19 AM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमाचल में कांग्रेस का कल्चर बन चुकी गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कैसे अपना खाता खोलेगी? यह इसके सामने बड़ा यक्ष प्रश्न है। राहुल गांधी का भरोसा जीतने के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठते ही कुलदीप सिंह राठौर के लिए संगठन को एकजुट करना सिरदर्दी बन गया है।

विज्ञापन


राठौर की अभिनंदन रैली में अनुशासनहीनता की धमकी देना कांग्रेस के दो गुटों ने मजाक की तरह ले लिया। प्रभारी रजनी पाटिल की चेतावनियों को तो कांग्रेेस के ये खेमे शुरू से ही हल्के में ले रहे हैं।   

दो-तीन महीनों के बाद लोकसभा चुनाव है। पिछले कई सालों से वीरभद्र-सुक्खू के बीच चल रही जुबानी लड़ाई के बीच ही एक  वर्ष पहले विधानसभा चुनाव मेें कांग्रेस की 68 में से 21 सीटों पर सिमटकर बुरी तरह से हार हुई। 

विज्ञापन

कांग्रेस इस लड़ाई मेें भाजपा की चिंता को ही कम कर रही

इससे पहले ही मोदी लहर के बीच लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का हिमाचल में अपनी सरकार रहते चारों सीटों पर सूपड़ा साफ हो गया था। अब मोदी मैजिक को धूमिल मान रहे प्रदेश कांग्रेस नेता जहां आगामी लोकसभा चुनाव में चारों सीटें फतह कर लेने की बातें कर रहे हैं, वहीं खुद खतरनाक गुटबाजी में ही धंसे हुए हैं।

कांग्रेस के ये नेता भाजपा से ज्यादा अपनों पर न केवल कीचड़ ही उछालते आए हैं, बल्कि वीरवार को तो लहूलुहान करने को उतारू हो गए हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस इस लड़ाई मेें भाजपा की चिंता को ही कम कर रही है। 
विज्ञापन

कांग्रेस में पहले भी हो चुकी ऐसी घटनाएं

कांग्रेस पार्टी के अंदर इस तरह घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। सात साल पहले कांग्रेस प्रभारी चौधरी बीरेंद्र सिंह के खिलाफ कांग्रेस के एक गुट के युवा नेता कांग्रेस कार्यालय के बाहर ही नारेबाजी करते रहे।

बाद में निष्कासित भी हुए। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर के साथ भी कांग्रेस का एक खेमा धक्कामुक्की कर चुका है। कांग्रेस के केंद्रीय नेता आनंद शर्मा के साथ भी झड़प हो चुकी है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें