हिमाचल में अवैध भवनों को वैध करने के कानून के लागू नहीं होने के पेच में खुद सत्तासीन पार्टी कांग्रेस का प्रदेश कार्यालय राजीव भवन शिमला भी फंस गया है। इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलती तो इसके लागू होते ही राजीव भवन की दो मंजिलें वैध हो जातीं।
कांग्र्रेस कार्यालय की इन दो मंजिलों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी मजबूरन लंबे समय से बंद रखे हैं। यह पार्टी भवन भी तय नियमों को तोड़कर बनाया गया था। इसे नियमित करने का विशेष केस बनाकर भी राज्य सरकार को भेजा गया था, मगर इस पर खडे़ हुए विवाद के बाद राज्य सरकार ऐसे किसी कदम से बचना चाहती है जिससे जनता में किरकिरी हो।
प्रदेश कांग्र्रेस कमेटी का राज्य कार्यालय राजीव भवन शिमला वर्ष 2004 में बनाया गया था। इसकी छह मंजिलें और एक पार्किंग हैं। दो मंजिलें इसकी बंद रखनी पड़ी हैं। ये बेसमेंट की हैं। केवल चार मंजिलें और पार्किंग ही इसकी खुली हुई हैं।
इसी में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के अलावा कार्यालय महासचिव, मीडिया विभाग, कांग्रेस के तमाम फ्रंटल संगठनों के कार्यालय और सम्मेलन कक्ष हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने वर्ष 2012 के चुनाव से पहले जो कांग्रेस घोषणापत्र तैयार किया था, उसी में सत्ता में आने पर शिमला शहर के भवनों को नियमित करने के कानून को बनाने की भी घोषणा की गई थी।
हाल ही में संबंधित विधेयक को प्रदेश विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की रजामंदी से पारित किया गया और अब ये राजभवन शिमला में अटका पड़ा है। अवैध भवनों को नियमित करने की इस सरकारी प्रक्रिया पर हिमाचल हाईकोर्ट की भी कड़ी टिप्पणी आ चुकी है। उधर, जनहित के मद्देनजर आचार्य देवव्रत भी इस विधेयक को मंजूर करने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहते हैं।