अध्ययन में मंडी के पंडोह, कुल्लू के बजौरा और शिमला के धमून व शोघी का विस्तृत आकलन किया गया है। काउंसिल ऑन एनर्जी वाटर एंड एन्वायरन्मेंट नई दिल्ली का यह अध्ययन रिसर्च स्कवेयर प्रिपिंट प्लेटफॉर्म पर छपा है। काउंसिल ऑन एनर्जी वाटर एंड एन्वायरन्मेंट (सीईईडब्ल्यू) की अहाना चटर्जी और मीत कुमार के शोध के अनुसार 1980 से 2024 के बीच इन चारों क्षेत्रों में निर्मित क्षेत्र तेजी से बढ़ा। धमून में करीब 43 प्रतिशत, बजौरा में 44 प्रतिशत, पंडोह में 38 प्रतिशत और शोघी में 24 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। वहीं धमून में पेड़ों का क्षेत्र करीब 30 प्रतिशत, पंडोह में 25 प्रतिशत और शोघी में 19 प्रतिशत घटा है।
पांच दशक में आठ गुना बढ़ गईं मौसमी घटनाएं
आंकड़ों के अनुसार हिमाचल में पिछले पांच दशकों में अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं की आवृत्ति करीब आठ गुना बढ़ी है। अत्यधिक बारिश, बाढ़, बादल फटना और हीटवेव का असर कृषि, बागवानी और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा है। 2023 की बाढ़ में राज्य को 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान और सैकड़ों मौतों का उल्लेख अध्ययन में है।