हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष और सदस्य पंचायती राज संस्थानों के चुनाव लड़ने के लिए योग्य हैं। वे 'लाभ के पद' की श्रेणी में नहीं आएंगे। पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक द्वारा जारी पत्र (दिनांक 7 मई 2026) में स्पष्ट किया गया है कि विधि विभाग से परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।
पत्र में कहा गया है कि बाल कल्याण समिति एक सांविधिक/अर्ध-न्यायिक संस्था है। इसके अध्यक्ष एवं सदस्य राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, लेकिन वे सरकारी नियमित स्थापना पर नहीं होते और उन्हें केवल सम्मान राशि या बैठक शुल्क मिलता है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्य (अयोग्यता निवारण) अधिनियम, 1971 के तहत ऐसे पदों को छूट दी गई है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 के तहत इन पदों पर बैठे व्यक्ति अयोग्य नहीं माने जाएंगे।
इसलिए सीडब्लूसी के अध्यक्ष एवं सदस्य बिना किसी अड़चन के पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं। यह स्पष्टीकरण उन सभी जिलों के जिला पंचायती राज अधिकारियों, उपायुक्तों, राज्य निर्वाचन आयोग और ब्लॉक विकास अधिकारियों को भेजा गया है। यह फैसला उन व्यक्तियों के लिए राहत भरा है जो बाल कल्याण समितियों में काम करते हुए स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ना चाहते थे। अब उन्हें कानूनी अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा।