बैठक में वन, खनन और भू माफिया को सलाखों के पीछे भेजने के लिए बनाए गए कठोर नियमों को मंजूरी मिल सकती है। इसके अलावा प्रदेश में स्थित औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली बिजली की दरों को भी कम करने का फैसला हो सकता है।
बीते दिनों पंजाब सरकार ने उद्योगों को पांच रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली देने का फैसला लिया है। पंजाब के इस फैसले से हिमाचल को उद्योगों के पलायन का भय सता रहा है। हिमाचल में वर्तमान में औद्योगिक इकाइयों को 5.65 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली दी जा रही है।
मंत्रिमंडल की बैठक में छोटे और बड़े बिजली प्रोजेक्टों के आवंटन की प्रक्रिया में भी सरकार बदलाव कर सकती है। इसके अलावा प्रदेश में आईपीएच और लोक निर्माण विभाग के नए डिविजन और सब डिविजन खोलने का भी सरकार फैसला ले सकती है।
पूर्व कांग्रेस सरकार के समय बिना बजट प्रावधान के खोले गए कॉलेजों और अपग्रेड किए गए स्कूलों को बंद करने का फैसला भी कैबिनेट बैठक में हो सकता है। अप्रैल 2017 के बाद कांग्रेस ने प्रदेश में 16 नए डिग्री कॉलेज खोले हैं, जबकि तीन निजी कॉलेजों का अधिग्रहण किया है।
नए खोले गए आठ कॉलेजों में अभी विद्यार्थियों की संख्या शून्य है, जबकि सात कॉलेजों में 19 से लेकर 52 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करने को लेकर भी सरकार फैसला ले सकती है।
बजट सत्र की तारीख भी हो सकती है तय
हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक में बजट सत्र की तारीख भी तय हो सकती है। प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले को कैबिनेट की बैठक में लाया जा रहा है। बजट सत्र फरवरी-मार्च में होता है। सचिवालय में बजट को लेकर प्लानिंग शुरू हो गई है। जयराम सरकार को यह पहला बजट होगा।