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जयराम सरकार ने कर्मचारियों, भवन मालिकों को दी ये सौगात

Sun, 04 Feb 2018 09:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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धर्मशाला में हुई जयराम सरकार की कैबिनेट बैठक में अहम फैसले लिए गए। हिमाचल में अवैध तरीके से बनाए गए भवनों को पूरा नहीं गिराया जाएगा, बल्कि इनका अनधिकृत हिस्सा ही गिरेगा।

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धर्मशाला में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हिमाचल प्रदेश नगर एवं नियोजन नियम 2018 में संशोधन करने पर फैसला ले लिया गया। इससे न केवल बड़ी संख्या में प्रदेश के होटल मालिकों को राहत दी जा रही है, बल्कि आम लोगों को भी लाभ होगा।

पहले अवैध भवनों से बिजली और पानी के कनेक्शन भी काट लिए गए थे। अब ऐसे भवनों के अनधिकृत हिस्से से ही बिजली और पानी कटेगा। नियमों में संशोधन के बाद बेशक केवल अधिकृत भवन का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा, मगर अगर किसी ने अनधिकृत तरीके से सीढ़ियां भी लगा रखी हैं तो वे भी तोड़ दी जाएंगी, जिससे अवैध हिस्से का इस्तेमाल नहीं किया जा सके। 

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अनुबंध महिला कर्मचारियों को तोहफा

मंत्रिमंडल ने महिला अनुबंध कर्मचारियों की प्रसूति अवकाश 135 दिनों से 180 दिनों तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्हें अब नियमति महिला कर्मचारियों के के समान प्रसूति अवकाश की सुविधा मिलेगी। 

बैठक में सामान्य तबादलों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया। ये फैसला आगामी आदेशों तक लागू रहेगा। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने की।

प्रदेश में बनाई जाएगी 2 हजार किलोमीटर लंबी सड़कें

मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश राज्य सड़क परियोजना चरण-2 के लिए डिजाइन सलाहकार की सेवाएं लेने के लिए ईओआई आमंत्रित करने का फैसला किया। इस परियोजना के तहत विश्व बैंक सहायता के तहत 2000 किलोमीटर की सड़क की लंबाई का विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन किया जाएगा। 

राज्य में 650 किलोमीटर की सड़क की लंबाई के लिए सामाजिक-पर्यावरण और सड़कों के सुरक्षा उपायों सहित विस्तृत इंजीनियरिंग डिजाइनों के साथ-साथ राज्य सड़क नेटवर्क की 1350 किलोमीटर की सड़क की अवधि के रखरखाव कार्य के अलावा भी निर्णय लिया गया।

शराब की बिक्री के लिए मंत्रीमंडल ने लिया ये फैसला

शीतकालीन विस सत्र के दौरान हुई कैबिनेट बैठक में वर्तमान शराब नीति को भंग करने के फैसले से जयराम सरकार एक कदम और आगे बढ़ गई है। शनिवार को धर्मशाला में हुई बैठक में सरकार ने पिछली भाजपा सरकार के दौरान रही थोक शराब सप्लाई की व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया।

सरकार ने विभाग को 5 फरवरी से नए वित्तीय वर्ष में शराब बेचने के लिए लाइसेंस लेने को आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की भी मंजूरी दी है। सरकार को उम्मीद है कि उसे इस फैसले के बाद करीब डेढ़ हजार करोड़ का आबकारी राजस्व हासिल हो सकता है।

पिछली सरकार में बीवरेजेस लिमिटेड के माध्यम से शराब बिक्री की जाती थी। इसके जरिये पिछले साल विभाग ने करीब 1307 करोड़ का आबकारी राजस्व अर्जित किया था। जिस पॉलिसी के तहत शराब बिक्री हो रही थी, उसे जयराम सरकार ने निरस्त कर दिया।

इसके बाद नए वित्तीय वर्ष के लिए नई नीति पर चर्चा चल रही थी। अब सरकार ने तय किया है कि बीयर, आईएमएफएल, वाइन और साइडर की थोक बिक्री को एल 1 और देशी शराब की थोक बिक्री फुटकर वेंडर को करने के लिए एल 13 व्यवस्था एक अप्रैल 2018 से लागू हो जाएगी।

इसके अलावा लाइसेंस जारी करने के लिए 5 फरवरी से आवेदन मांगने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सूत्रों का कहना है कि चूंकि इस प्रक्रिया में महीने का समय लगता है, इसलिए जयराम मंत्रिमंडल ने नए वित्तीय वर्ष में शराब बिक्री एक अप्रैल से निर्बाध रूप से हो सके, उसके लिए अभी से विभाग को आवेदन लेकर लाइसेंस वितरण की प्रक्रिया पूरी करने को यह मंजूरी दी है।

इस दिन से होगा बजट सत्र

सरकार ने 6 मार्च से विधानसभा का बजट सत्र शुरू करने का निर्णय लिया है। जयराम सरकार के पहले बजट के लिए विभागीय तैयारियां चल रही हैं। सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें 17 से 25 मार्च तक सदन नहीं चलाया जाएगा।

मंत्रिमंडल की बैठक में आगामी बजट सत्र आहूत करने पर निर्णय लिया गया। संभावना है कि भाजपा सरकार के पहले बजट का प्लान आकार 67 सौ करोड़ का रहने वाला है, जबकि कुल बजट लगभग 39 हजार करोड़ का रहेगा।

कर्ज लेने की लिमिट बढ़े बजट आकार के कारण और बढ़ेगी। विधायकों की प्राथमिकताओं को लेकर लगभग साढ़े पांच सौ करोड़ की योजनाएं भी रहेंगी, जिसको लेकर मुख्यमंत्री जयराम की अध्यक्षता में अगले सप्ताह बैठक होनी है।

हर विधायक के क्षेत्र में 6 नए निर्माण योजनाएं सरकार स्वीकृत करेगी। एक माह चलने वाले बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के साथ आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट, कैग की रिपोर्ट और बजट टेबल किया जाता है। विपक्ष की और से कटौती प्रस्ताव लाए जाते हैं।

करुणामूलक भर्तियों के लिए महकमों को छूट

 हिमाचल सरकार ने करुणामूलक भर्तियों के लिए महकमों को छूट दे दी है। शनिवार को धर्मशाला में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने कोटे और बैचवाइज से विभागीय भर्तियों पर लगाई रोक हटा दी है।

जयराम सरकार ने सत्ता में आते ही सभी भर्तियों पर रोक लगा दी थी। अब पूर्व में लिए गए फैसले में संशोधन करते हुए सरकार ने विशेष श्रेणियों की भर्तियों को राज्य लोकसेवा और राज्य कर्मचारी चयन आयोग के दायरे से बाहर कर दिया है।

मंत्रिमंडल ने करुणामूलक आधार पर, खिलाड़ियों के लिए तीन प्रतिशत कोटे के तहत, विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों में से, संबंधित भर्ती नियमों में विशेष प्रक्रिया के अनुसार बैचवाइज आधार पर तथा पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती प्रक्रिया में छूट दी है।

इन भर्तियों को हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के क्षेत्राधिकार से बाहर करने का निर्णय लिया गया है। अन्य सभी मामलों में संबंधित विभाग सभी पहलुओं पर जांच करने के बाद स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री को प्रस्तुत करेंगे। सरकार के इस फैसले से विभिन्न विभागों में नौकरियों के इंतजार में बैठे हजारों लोगों को लाभ मिलेगा।


 

नौणी विश्वविद्यालय में भरे जाएगे इतने पद

इसके साथ ही डॉ. वाईएस परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी (सोलन) में अनुबंध आधार पर सहायक प्रोफैसर/समकक्ष के 14 रिक्त पदों को भरने का भी निर्णय लिया गया।

कैबिनेट ने  सहकारिता विभाग में पंजीयक सहकारी सभाएं का एक रिक्त पद भरने का निर्णय लिया। साथ ही मंडी जिला के थुनाग में नया सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंडल खोलने तथा धर्मपुर के भराड़ी में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंडल तथा मंडी जिला के टीहरा और मंडल में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य उप-मंडल के सृजन को अपनी स्वीकृति प्रदान की ।

बीमार उद्योगों को राहत देने की नीति वापस ली 

जयराम सरकार ने पिछली सरकार का एक और फैसला पलट दिया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के बीमार उद्योगों को राहत देने के लिए वीरभद्र सरकार कर छूट सहित कई अन्य लाभ दिए जाने को बीमार एमएसएमई नीति लाई थी।

इस नीति के तहत आने वाले उद्योगों को अगले दस वर्ष तक छूट मिलनी थी। शराब निर्माण से संबंधित इकाइयों को भी इसमें शामिल किया गया था, लेकिन मंत्रिमंडल ने शनिवार को नीति को वापस ले लिया। अब सरकार नए सिरे से पॉलिसी लाने की तैयारी में है।

वीरभद्र सरकार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीमार उद्योगों को राहत देने के लिए विवादित नीति लाई थी। उस समय ब्यूरोक्रेसी ने इस नीति को लाने का खासा विरोध किया था। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने तीन मंत्रियों की उपसमिति बनाई।

प्रारंभिक ड्राफ्ट में 28 सौ करोड़ का बोझ सरकार पर पड़ना था, जिसमें संशोधन किया गया। कई प्रावधानों को हटाने के बाद वीरभद्र मंत्रिमंडल ने जिस नीति को पारित किया, उससे एक हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। जयराम सरकार ने अब इस नीति को ही निरस्त कर दिया है।

सूत्रों की मानें तो ब्यूरोक्रेसी ने सरकार को इस नीति से होने वाले नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री को एक रिपोर्ट दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट प्रस्ताव लाने के आदेश दिए। अब जयराम मंत्रिमंडल ने बीमार उद्योगों को राहत देने के लिए नई नीति तैयार करने को कहा है।

नई नीति में किन औद्योगिक इकाइयों को शामिल किया जाना है, किस तरह के वित्तीय और अन्य लाभ दिए जाने हैं और किन शर्तों का उद्योगों को अनुपालन करना होगा इस पर अध्ययन होगा। 

मार्च में 3500 से 7000 तक बढ़कर मिलेगी तनख्वाह

 प्रदेश के पौने तीन लाख नियमित कर्मचारियों को मार्च महीने में 3500 रुपये से लेकर 7000 रुपये तक तनख्वाह बढ़कर मिलेगी। मंत्रिमंडल ने शनिवार को प्रदेश के नियमित सरकारी कर्मचारियों तथा पेंशनरों को 8 प्रतिशत अंतरिम राहत जारी करने को स्वीकृत दी।

यह 8 प्रतिशत अंतरिम राहत राशि फरवरी के वेतन के साथ 1 मार्च 2018 को देय होगी। 1 जनवरी 2016 से लेकर 31 जनवरी 2018 तक का एरियर कर्मचारियों के जीपीएफ  खाते में जमा किया जाएगा।

इस अवधि या नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को अंतरिम राहत एरियर की राशि का भुगतान एक मुश्त 1 मार्च 2018 को नकद देय होगा। सरकार द्वारा कर्मचारियों तथा पेंशनरों को दिया जाने वाला यह 700 करोड़ रुपयों का वित्तीय लाभ सबसे बड़ा वित्तीय लाभ है।

जयराम सरकार का तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध

सूबे की जयराम सरकार ने अधिकारियों कर्मचारियों के तबादलों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। शनिवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में तबादलों पर अग्रिम आदेश तक प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया।

मुख्यमंत्री के स्तर से भी कोई तबादला आदेश जारी नहीं होगा। मंत्रिमंडल के इस आदेश से सूबे के करीब ढाई लाख सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों पर असर होगा। कैबिनेट का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू होने के साथ ही आगामी आदेशों तक जारी रहेगा।

अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से तबादले हो रहे थे लेकिन बैठक में खुद मुख्यमंत्री ने पहल करते हुए अपने स्तर से होने वाले तबादलों को भी बंद करने का फैसला लिया है।

विभागीय भर्तियों पर रोक जारी
तबादलों के साथ ही विभागों द्वारा की जाने वाली भर्तियों पर अब भी रोक बरकरार रखी गई है। पुलिस, परिवहन जैसे विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती लंबित चल रही है। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बैठक में जयराम सरकार कोई निर्णय लेगी लेकिन सरकार ने इस बार भी इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया।
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पूर्व मंत्रियों को पीएसओ देने पर जयराम की ना

पूर्व मंत्रियों को पीएसओ दिये जाने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने अस्वीकार कर दिया है। पूर्व मंत्रियों की ओर से पीएसओ दिये जाने की मांग पर कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री जयराम ने इस प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया है।

इसके अलावा पूर्व सरकार के शिक्षा विभाग से संबंधित निर्णय को पलटने से पहले उनका दोबारा परीक्षण करने का आदेश दिया है। सरकार के इस फैसले से पूर्व मंत्रियों को झटका माना जा रहा है।

सरकार का मानना है कि पीएसओ दिये जाने से अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि इस मामले पर नए सिरे पुनर्विचार की गुंजाइश रखी गई है। इसके अलावा पूर्व सरकार के फैसलों की समीक्षा से संबंधित भर्तियों के मामलों को कैबिनेट में नहीं लाया गया।
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