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भाजपा सांसदों से चार साल का हिसाब मांगेगी कांग्रेस, यहां बनाई रणनीति

Sun, 04 Feb 2018 09:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी भाजपा के चारों लोकसभा सांसदों से चार साल का हिसाब मांगेगी। वर्ष 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। 

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ये रणनीति शनिवार को ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक में तय की गई। इसमें ये भी तय हुआ कि सांसदों को उन्हीं के घरों में घेरा जाएगा। चारों संसदीय क्षेत्रों में कार्यकर्ता सम्मेलन करने और उसके बाद राज्य स्तरीय कार्यक्रम रखने का भी फैसला लिया गया। 

शनिवार को कांग्रेस पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में पीसीसी सचिवों और ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्षों की बैठक हुई। इसमें लोकसभा चुनाव पर मंथन किया गया। 
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सुक्खू की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए ब्लॉक अध्यक्षों की राय भी ली गई है। लंबे विचार-विमर्श के बाद प्रदेश में चार साल का ‘हिसाब दें सांसद, जबाव दें सांसद’ स्लोगन के साथ प्रदेशव्यापी अभियान शुरू करने का भी निर्णय लिया गया। 

भाजपा के वादे कोरे साबित हुए : सुक्खू 

सुक्खू ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार किया जाए। चारों संसदीय क्षेत्रों में ‘हिसाब दें सांसद-जबाव दें सांसद’ अभियान के तहत कार्यकर्ता सम्मेलन किए जाएंगे।

इनमें हिमाचल कांग्रेस प्रभारी सुशील शिंदे, सह प्रभारी रंजीता रंजन, पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह और सभी पूर्व मंत्री और विधायक मौजूद रहेंगे। चारों संसदीय क्षेत्रों में सम्मेलनों के बाद राज्य स्तरीय सम्मेलन होगा। बैठक में कांग्रेस महासचिव तथा विधायक रामलाल ठाकुर, महासचिव हरभजन सिंह भज्जी, नरेश चौहान मौजूद रहे।

कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि जनता भाजपा सांसदों से चार साल का हिसाब मांगेगी। केंद्र की मोदी सरकार के इस मई में चार साल पूरे होने जा रहे हैं। इस दौरान सांसद हिमाचल के लिए कौन सी बड़ी परियोजना लाए, उन्हें जनता को बताना होगा। भाजपा के जनता के साथ चुनाव से पहले के सब वादे कोरे ही साबित हुए हैं। 
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इन मुद्दों पर भी मांगा सांसदों से जवाब

हिमाचल की चार हजार करोड़ रुपये की सेब इंडस्ट्री को बचाने के लिए क्या किया? सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने के वादे कहां गुम हो गए? नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन एक साल में बनकर पूरी क्यों नहीं हुई?

लेह तक रेलवे लाइन पहुंचाने का वादा क्यों भूल गए? भानुपल्ली-बिलासपुर लाइन कागजों से आगे क्यों नहीं बढ़ पाई? अंब-नादौन-सुजानपुर-पालमपुर और ऊना-हमीरपुर लाइन का सर्वे क्यों नहीं हुआ? 
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