सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शिमला में 2906 करोड़ रुपये और धर्मशाला के लिए 2105 करोड़ रुपये के कार्यों के लिए एसपीवी बनाया है। स्मार्ट सिटी के लिए काम तेज करने के लिए सरकार ने अब एसपीवी को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
एक एसपीवी में विभिन्न श्रेणियों के 24 पदों को दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरा जाएगा, जबकि 26 पदों को आउटसोर्स आधार पर भरा जाना है।
मंत्रिमंडल ने एआईसीटीई मापदंडों के अनुरूप तकनीकी शिक्षा विश्वविद्यालय हमीरपुर से संबद्ध विभिन्न संस्थानों में संचालित पाठ्यक्त्रस्मों में प्रवेश देने का निर्णय लिया। इससे तकनीकी शिक्षा के बेहतर अवसर युवाओं को मिल सकेंगे। मंडी जिले के निहारी में आईटीआई खोलने का निर्णय लिया है।
- शिमला जल प्रबन्धन निगम सीमित की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की।
- स्कूलों में तैनात परिवहन वाहनों के सुरक्षित संचालन के लिए परिवहन दिशा निर्देशों को सैद्धांतिक मंजूरी दी।
- परिवहन विभाग मुख्यमंत्री की ओर से सभी निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भेजेगा पत्र।
- प्राथमिक सहायक अध्यापकों की तर्ज पर प्रारंभिक शिक्षा विभाग में कार्य कर रहे ग्राम विद्या उपासकों के लिए स्थानान्तरण नीति तैयार।
- प्रतिमाह 21,500 रुपये का मानदेय, तीन प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, 12 दिनों का आकस्मिक अवकाश तथा 10 दिनों का चिकित्सा अवकाश भी मिलेगा।
- छूटे हुए ग्रामीण विद्या उपासकों को प्राथमिक सहायता अध्यापकों के समान 21,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय तथा तीन प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि।
- स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शिमला तथा धर्मशाला स्मार्ट सिटी के लिए विशेष प्रयोजन वाहन में विभिन्न पदों के सृजन तथा इन्हें भरने का निर्णय लिया।
- शिमला व धर्मशाला स्मार्ट सिटी के लिए विभिन्न श्रेणियों के 24-24 पदों को सेकंडमेंट आधार पर तथा 26-26 पदों को आउटसोर्स आधार भरना।
- केन्द्रीय सड़क निधि के अंतर्गत सलापड़ ततापानी सड़क को चौड़ा करने के कार्य में तेजी लाने के लिए विभिन्न श्रेणियों के 9 पदों को भरना।
- मंडी जिले के कांगु (सलापड़) में हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के उपमंडल की एक नई परियोजना कार्यान्वयन इकाई के सृजन का निर्णय लिया।
- मंडी जिले के थुनाग स्थित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में अतिरिक्त कमरों के निर्माण को स्वीकृति।
- मंडी के निहारी में विभिन्न श्रेणियों के 30 पदों के सृजन व छ पाठ्यक्रमों सहित नया औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोलने की स्वीकृति।
- कांगड़ा जिले के पशु औषधालय सुलह को पशु अस्पताल में स्तरोन्नत करने और अस्पताल के प्रबंधन के लिए विभिन्न पदों का सृजन तथा इन्हें भरने का भी निर्णय लिया।
- एआईसीटीई मापदंडों के अनुरूप तकनीकी शिक्षा विश्वविद्यालय हमीरपुर से संबद्ध विभिन्न संस्थानों द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश।
- ग्राम पंचायत बहल को मंडी जिले के पुलिस स्टेशन सदर से बाहर कर इसे पुलिस स्टेशन बल्ह में सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया।
- शिमला जिले की ग्राम पंचायत कलेड़ा-मझेवटी को पुलिस स्टेशन ननखड़ी से बाहर कर पुलिस स्टेशन रामपुर में शामिल करने को मंजूरी।
- धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र की सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के धर्मपुर मंडल के उप मंडल टिहरा की छह पंचायतों, जिनमें पपलोग, बसंतपुर, रखोह, बकराटा, दरापा तथा बरछवाड़ को सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के मंडी जिला के मंडल/उप मंडल सरकाघाट में स्थानांतरित किया।
- धर्मपुर मंडल के उप मंडल टिहरा के अंतर्गत सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अनुभाग चोलथारा के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाली इन पंचायतों को मंडी के सरकाघाट मंडल/उप मंडल के अंतर्गत रखोह में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अनुभाग का सृजन कर स्थानांतरित किया।
- आईपीएच विभाग की सुंदरनगर स्थित मंडल/उप.मंडल में सीवरेज अनुभाग सृजित करने को स्वीकृति।
- होमगार्ड व नागरिक सुरक्षा विभाग की आवाजाही को प्राकृतिक आपदाओं और विपत्तिकाल में बेहतर कार्य करने के उद्देश्य से 10 नए ट्रक खरीदने की स्वीकृति।
- मंडलायुक्त कार्यालय शिमला में अनुबंध आधार पर कनिष्ठ कार्यालय सहायकों (आईटी) के तीन पद सृजित करने की स्वीकृति
- मत्स्य विभाग के विभिन्न कार्यालयों व मत्स्य फार्मों में अंशकालिक आधार पर 12 सफाई कर्मी नियुक्त करने की स्वीकृति।
नूरपुर स्कूल बस हादसे से सबक लेकर सरकार ने स्कूल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी गाइडलाइन जारी कर दी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में स्कूल बस ट्रांसपोर्ट गाइडलाइन को सैद्धांतिक सहमति दी।
नए सुरक्षा मानकों में स्कूल बस में सीसीटीवी और जीपीएस अनिवार्य किया है, जबकि 40 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक रफ्तार के लिए स्पीड गवर्नर लगाने होंगे। छोटे बच्चों को ड्राप करने के लिए स्कूलों को महिला कर्मचारी रखनी होगी। अगर कोई स्कूल तय दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता है तो उसकी मान्यता रद्द करने जैसा सख्त प्रावधान किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के तय दिशानिर्देशों के अनुरूप सीबीएसई की तय स्कूल ट्रांसपोर्ट सुरक्षा गाइडलाइन को हिमाचल ने अपनाया है। प्रदेश के अनुरूप इसमें आंशिक बदलाव किये गए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से परिवहन विभाग हर स्कूल प्राचार्य को नए दिशानिर्देशों से अवगत करवाएगा। पुलिस और परिवहन विभाग गाइडलाइन प्रभावी करने के लिए जबावदेह होंगे।
बच्चों को स्कूलों तक लाने ले जाने के लिए अनुभवी ड्राइवर रखने होंगे। छोटे बच्चों की बस में सीट से अधिक संख्या नहीं की जा सकेगी, जबकि एक महिला कर्मी तैनात होगी। परिवहन निगम की बस के अलावा अन्य बसों का रंग पीला रहेगी और बस के बाहर गाड़ी के ड्राइवर का नाम, फोन नंबर और लाइसेंस नंबर अंकित करना होगा।
नूरपुर स्कूल बस हादसे से सबक लेकर सरकारी और निजी स्कूलों में अब नई व्यवस्था लागू की जाएगी। सोमवार को जयराम मंत्रिमंडल ने नई गाइडलाइन को हरी झंडी देते हुए स्कूलों को टैक्सियों का इंतजाम करना अनिवार्य कर दिया है।
यही नहीं, छोटे बच्चों की टैक्सियों में अब एक अभिभावक बारी-बारी से स्कूल गेट तक छोड़ने जाएंगे। छुट्टी होने के बाद बच्चों को घर के पास स्टॉपेज पर छोड़ने के लिए स्कूलों को एक महिला कर्मचारी की नियुक्ति करनी पड़ेगी। इसके अलावा स्कूलों की पार्किंग में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे।
स्कूलों को टैक्सी का इंतजाम करने का जिम्मा इसलिए दिया गया है ताकि बाहरी टैक्सी चालक अभिभावकों की जेब पर डाका न डाल सकें। सीसीटीवी कैमरों से स्कूल प्रबंधन को यह पता रहेगा कि कौन सा छात्र टैक्सी में आया है और कौन बस से स्कूल पहुंच रहा है। कैमरे लगाए जाने से आने-जाने वाले व्यक्तियों पर भी नजर रहेगी।
सीट के नीचे रखे जाएंगे बैग- स्कूली छात्रों के बैग सीट के नीचे रखे जाएंगे। बच्चों के बैग रखने की व्यवस्था स्वयं टैक्सी चालक को करनी होगी।
-स्कूल बसों का रंग पीला हो। बस के आगे और पीछे स्कूल बस लिखा हो।
-एजेंसी से अनुबंध पर ली गई बसों पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखवाया जाए।
-बसों में स्पीड गवर्नर लगाए जाएं, बस की अधिकतम स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक न हो।
-स्कूल बस की गतिविधि पर नजर रखने के लिए जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
-बसों में अलार्म बेल लगाई जाए, आपातकाल में अन्य स्थानों पर ही अलार्म बजना चाहिए।
-स्कूल बसों में ड्राइवर का नाम, पता, लाइसेंस नंबर और स्कूल का नाम, पता, फोन नंबर लिखा जाए।
-बसों में आपातकालीन दरवाजे होने चाहिए। प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए।
-स्कूल बसों में सीट क्षमता के अनुरूप ही छात्रों को बैठाया जाए। अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए।
-प्रत्येक स्कूल बस की खिड़कियों में लोहे की ग्रिल हो। बसों के दरवाजे को अंदर से बंद करने की व्यवस्था हो।
-प्रत्येक बस चालक को कम से कम पांच साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव हो।
-किसी भी ड्राइवर को रखने से पहले उसका सत्यापन कराना जरूरी है।
-चालक का कोई चालान नहीं होना चाहिए और न ही उसके खिलाफ कोई कानूनी मामला हो।
-बसों में बैग रखने के लिए सीट के नीचे व्यवस्था होनी चाहिए।
-चालक के अलावा बस में एक परिचालक होना भी अनिवार्य तौर पर होना चाहिए।
-स्कूल बसों में अंदर से पर्दे न लगे हों। बस के शीशे भी रंगीन नहीं होने चाहिए।
-स्कूल प्रबंधन परिवहन विभाग से बस के परमिट और इंश्योरेंस की जांच करे।
-मोटर व्हीकल एक्ट के तहत बस चालक की प्रतिवर्ष स्वास्थ्य जांच होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) के सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन केस पर चर्चा की। मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से पूरे प्रकरण में दर्ज मामलों को राजनीतिक से प्रेरित माना है। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करेगी कि राजनीति से प्रेरित होकर पूर्व सरकार ने यह केस दर्ज किये।
वहीं, सरकार के इस निर्णय से पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ अभियोजन मंजूरी वापसी का रास्ता खुल गया। इससे पहले सरकार दो आईएएस अफसरों की अभियोजन मंजूरी वापस ले चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से एचपीसीए केस के संबंध में पूछा था, जिसका जवाब सरकार को फाइल करना है।
सरकार के एचपीसीए केस को राजनीति से प्रेरित होने के जवाब पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चलेगी। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण सरकार एचपीसीए का केस वापस नहीं ले सकती। उधर, इस निर्णय का पूर्व सरकार की विभिन्न आरोपियों के खिलाफ दी अभियोजना मंजूरी पर असर पड़ेगा।
पूर्व सीएम धूमल केस वापस लेने को लेकर सरकार को पत्र भी लिख चुके हैं। सरकार ने गोपनीयता बरतते हुए आखिरी समय में इस मामला को एजेंडे में शामिल किया। बैठक के बाद भी कैबिनेट सदस्यों और अफसरशाही ने इस निर्णय पर चुप्पी साधे रखी।