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Himachal Bullying Study: हिमाचल में 15.6% किशोर बुलिंग के शिकार, परिवार और मजबूत दोस्ती बनी सबसे बड़ी सुरक्षा

Thu, 30 Jul 2026 10:53 AM IST
Ankesh Dogra इंद्र सिंह थापा, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश के 7563 किशोरों पर किए गए अध्ययन में 15.6 प्रतिशत विद्यार्थी बुलिंग का शिकार पाए गए, जबकि 18.41 प्रतिशत किसी न किसी रूप में बुलिंग में शामिल मिले। शोध के अनुसार माता-पिता का भावनात्मक सहयोग और अच्छे मित्र बच्चों को बुलिंग से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों ने स्कूलों में एंटी-बुलिंग नीति और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की जरूरत बताई।
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बुलिंग पर बड़ा अध्ययन। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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बच्चों के लिए एक अच्छा दोस्त केवल खेलने का साथी नहीं, मुश्किल समय में सबसे बड़ी ढाल भी बन सकता है। हिमाचल के किशोरों पर हुए अध्ययन में सामने आया है कि माता-पिता के साथ मजबूत भावनात्मक जुड़ाव और सहयोगी मित्र समूह बच्चों को बुलिंग (साथियों द्वारा बार-बार परेशान करना) से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। स्टडी के मुताबिक जिन बच्चों को परिवार का भरोसा और अच्छे दोस्तों का साथ मिलता है, उनके बुलिंग का शिकार बनने या उसमें शामिल होने की आशंका अपेक्षाकृत कम रहती है। यह अध्ययन ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड, नई दिल्ली के शोधकर्ताओं ने किया है। शोध दल में दीपिका बहल, देविका मेहरा, निकिता पटेल, सरोज मोहंती, सुभा शंकर दास, ऋषि गर्ग, गौरव सेठी, अंजलि चौहान, सुनील मेहरा शामिल रहे।

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अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका पीएलओएस वन में दो अप्रैल 2026 को प्रकाशित हुआ। शोध के लिए नवंबर-दिसंबर 2023 के दौरान हिमाचल के सभी जिलों के 204 सरकारी स्कूलों में 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 7563 विद्यार्थियों से मानकीकृत प्रश्नावली के माध्यम से जानकारी जुटाई गई। 15.6 प्रतिशत विद्यार्थी बुलिंग का शिकार पाए गए, जबकि 18.41 प्रतिशत किशोर शारीरिक या साइबर बुलिंग जैसी घटनाओं में किसी न किसी रूप में शामिल मिले। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों का अपने माता-पिता के साथ बेहतर संवाद और भावनात्मक जुड़ाव था, उनमें बुलिंग का खतरा कम था। अध्ययन में सामने आया कि लड़के न केवल बुलिंग का शिकार अधिक बन रहे हैं, बल्कि बुलिंग करने वालों में भी उनकी संख्या अधिक है। लड़कों में शारीरिक बुलिंग का शिकार बनने की संभावना लड़कियों की तुलना में 1.91 गुना और साइबर बुलिंग का शिकार बनने की संभावना 1.41 गुना अधिक पाई गई। 

इसके साथ ही शारीरिक बुलिंग करने की संभावना 1.57 गुना और साइबर बुलिंग करने की संभावना 1.63 गुना अधिक दर्ज की गई। शोध में शहरी क्षेत्रों के किशोरों में भी गांवों की तुलना में बुलिंग का जोखिम ज्यादा पाया गया।

शोधकर्ताओं की सिफारिशें
माता-पिता और बच्चों के बीच नियमित संवाद बढ़ाया जाए। स्कूलों में प्रभावी एंटी-बुलिंग नीति लागू हो। मानसिक स्वास्थ्य व काउंसलिंग सेवाएं मजबूत हों। आयुष्मान भारत स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम को सशक्त बनाया जाए। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, जंक फूड और अन्य अस्वस्थ आदतों को कम करने पर ध्यान दिया जाए।
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बुलिंग का शिकार बच्चे अकसर सिरदर्द, पेट दर्द, नींद की कमी, भूख कम लगना और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। कई बार जांच सामान्य आती है, लेकिन इसकी वजह मानसिक तनाव होता है। -डाॅ. अंकुर धर्माणी, बाल रोग विशेषज्ञ

बच्चों के खेल-खेल में किया मजाक कभी-कभी बुलिंग बन सकता है। इसे नजरअंदाज न करें। माता-पिता और शिक्षक सुरक्षित संवाद का माहौल दें। स्वस्थ दोस्ती वही है जिसमें सहानुभूति, सम्मान और सीमाओं का ध्यान रखा जाए। -डॉ. दीपा राठौर, मनोवैज्ञानिक, डीडीयू शिमला
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