इसके तहत चीड़ की पत्तियों को इकट्ठा कर सीमेंट उद्योगों को भेजा जाएगा। सीमेंट उद्योगों से ही सीएसआर के तहत ट्रांसपोटेशन का खर्च लिया जाएगा। वन मंत्री ने कहा कि हिमाचल के जंगलों में आग लगने के कई कारण हैं। इसमें प्राकृतिक आग लगना और दूसरा कारण जानबूझ कर आग लगाना है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वनों में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए टोल फ्री नंबर 18001808097 जारी किया है। इस पर लोग आग की सूचना दे सकते हैं। फोन आने पर टीम तुरंत मौके पर पहुंचेगी।
उन्होंने बताया कि वन विभाग ने वीरवार सुबह आग से निपटने के लिए जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान दो सप्ताह तक चलेगा। इसके तहत पूरे प्रदेश में दो वाहन भी जागरूकता अभियान के तहत घूमेंगे। साथ ही लोगों को नाटकों व पंपलेट के माध्यम से भी जागरूक किया जाएगा।
विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि जंगलों में आग चोटियों से लगती है। वहां तक पहुंचने के लिए विभाग के पास उपकरण नहीं हैं। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि विदेशों की तर्ज पर हेलीकॉप्टर से आग बुझाने का कार्य किया जाए। उन्होंने जागरूकता अभियान पर खर्च किए जाने वाले बजट पर भी सवाल उठाए।
उधर, राकेश पठानिया ने अपने प्रश्न में कहा कि 80 फीसदी खुद लोग जंगलों में आग लगाते हैं? मुख्यमंत्री ने कहा कि जागरूकता अभियान पर खर्च करने को अनावश्यक बताना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों को लेकर भी विश्व स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
सरकार का यह फर्ज है कि लोगों को इस बारे में जागरूक करे। उन्होंने आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर के सुझाव पर विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने विधायक राकेश पठानिया के प्रश्न के उत्तर में कहा कि कुछ लोग घास के चक्कर में भी जंगल में आग लगाते हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मामले पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जंगलों में आग लगाना एक दंडनीय अपराध है। लेकिन यह पता लगाना मुश्किल है कि किसने जंगलों में आग लगाई है।
लेकिन फिर भी यदि कोई व्यक्ति जंगलों में आग लगाते हुए पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान पर धन खर्च करना अव्यवहारिक नहीं है।