विधानसभा शीत सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में बोलने का अवसर न देने पर विपक्ष ने नारेबाजी के साथ सदन से वाकआउट किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के सदन में न होने पर प्रतिपक्ष का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कहा कि विस अध्यक्ष चैंबर में सुबह तय हुआ था कि धन्यवाद प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के चार-चार लोग बोलेंगे। प्रतिपक्ष ने इन नियमों की पालना की, जबकि सत्तापक्ष के आला नेताओं ने प्रस्ताव पर बोलने के लिए पर्चियां विस अध्यक्ष तक पहुंचा दीं।
जब विपक्ष ने इस व्यवस्था पर प्रश्न उठाया तो विस अध्यक्ष विशेषाधिकार की बात करने लगे। आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष बार-बार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। यह संस्थाएं और विधानसभा परंपराएं किताबों से चलती हैं। स्पीकर इनका निर्वहन ढंग से करें। बजट सत्र में विपक्ष के सदस्य उनसे जवाब मांगेंगे। परमार ने बताया कि सदन के तीसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा की जानी थी, लेकिन छह पन्नों के अभिभाषण में जनता से किए वादों का कोई रोडमैप नहीं था। औपचारिकता के तौर पर बेबसी में राज्यपाल को अभिभाषण को पढ़ना पड़ा।
अपने बोझ तले दब जाएगी बिखरी सरकार
परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जनादेश की धज्जियां उड़ाई हैं। 25 दिन बाद भी मंत्रिमंडल नहीं बन पाया है। राज्यपाल के अभिभाषण से पहले ही सत्तापक्ष के सदस्य सदन से चले गए। कांग्रेस ने 25 दिन के कार्यकाल में संस्थानों को बंद कर जनता पर तानाशाही का चाबुक चलाया है। बिखरी (खज्जल) सरकार अपने बोझ तले ही दब जाएगी।