सरकार की ढाल बनते हुए कभी कभी वह अपनों पर वार करने से भी नहीं चूके। शीत सत्र में पठानिया लगातार विपक्ष पर हावी रहकर मुख्यमंत्री के समक्ष उनका सबसे बड़ा शुभचिंतक होने का सियासी दावा पेश करते दिखे। विपक्ष में अनुभव पर नया जोश हावी होता दिखा। जबकि जयराम की टीम डिफेंस में बीच बीच में शॉट लगाती दिखी।
सदन में कम्युनिस्ट पार्टी से एकमात्र सदस्य राकेश सिंघा ने पूरे सत्र में लाल झंडा बुलंद रखा। सदन में हर विषय पर सरकार को तथ्यों को ढाल बनाकर घेरने की कोशिश कर अपना रुतबा बनाते दिखे।
सदन के भीतर और बाहर तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत का जोश आखिर तक नजर आया। पूरे सत्र में गाय पर भी सियासत दिखी। भाजपा ने गाय के संरक्षण को लेकर सदन में बिल लाया तो कांग्रेस विधायक ने इसको राष्ट्रमाता का दर्जा देने का प्रस्ताव लाया।
शीत सत्र में तल्ख तेवरों के लिए जाने जाने वाले वीरभद्र सिंह खामोश रहे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के खिलाफ वीरभद्र सिंह ने एक बार भी तीखा प्रहार नहीं किया। पूरे सदन में उनकी चुप्पी को लेकर कई सियासी मायने निकाले गए।