फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधानसभा शीत सत्र: सरकार की हर रणनीति पर भारी पड़ा विपक्ष

Sun, 16 Dec 2018 01:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, (तपोवन) धर्मशाला
विज्ञापन
विज्ञापन

धौलाधार की वादियों में स्थित विधानसभा में शीत सत्र समाप्त हो गया। यूं तो सत्र के अंतिम दिन मजाक के बीच जल्द मिलने के वायदे के साथ खत्म हुआ। लेकिन इस बार के सत्र में विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने मंजे हुए खिलाड़ी की तरह सरकार की हर कदम पर मुश्किलें खड़ी कीं। कांग्रेस के तरकश में इतने तीर थे कि सरकार को अपने सबसे करीबी राकेश जम्वाल और दूरी रखने वाले राकेश पठानिया दोनों की ही मदद लेनी पड़ गई।

विज्ञापन


कांग्रेस ने पहले दिन की तीसरे मिनट में ही मुख्यमंत्री पर भाजपा चार्जशीट की जांच को लेकर दिए जा रहे बयानों पर घेरते हुए हमला कर दिया। इसके बाद पूरे सत्र भर कभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को दी जाने वाली वर्दी को लेकर शिक्षा और नागरिक आपूर्ति विभाग के बीच की खींचतान तो कभी बाबा रामदेव को नियम दरकिनार कर जमीन देने और फायदा पहुंचाने, ग्यारह महीने में ही साढ़े तीन हजार करोड़ का लोन लेने और वित्तीय स्थिति को और खराब करने, दो हेलीकॉप्टर लेने, उनका दुरुपयोग करने, कानून व्यवस्था बिगड़ने जैसे मुद्दों पर जमकर हमला किया। 

विज्ञापन

इन मुद्दों ने भी बढ़ाई सरकार की मुश्किल

शुरुआत में तो सरकार विपक्ष के हमले से सन्न रह गई। कोशिश भी की लेकिन सरकार का शोर मुकेश और जगत सिंह नेगी की बुलंद आवाजों के आगे हल्का ही रहा। अगले दिन से विपक्ष पर पलटवार की जिम्मेदारी राकेश पठानिया और राकेश जम्वाल ने संभाली।

तकरीबन हर मुद्दे पर विपक्ष के हमले पर दोनों राकेशों ने जवाबी हमला कर स्थिति संभाली। दोनों राकेश के जवाबी हमलों का ही नतीजा था कि नेता प्रतिपक्ष को भी यह कहना पड़ गया कि दोनों राकेश सरकार के करीबी हैं और उनके इशारे पर ही आवाज दबा रहे हैं। हालांकि काउंटर हमले का असर तो दिखा लेकिन सरकार की तैयारी में कमी ने उसे मुश्किलों में फंसाए ही रखा। 

यू तो सरकार ने अपने प्रयासों और कदमों पर खुद की पीठ थपथपाई, लेकिन विपक्ष ने सरकार के ही फैसलों को उनके खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। जिन मुद्दों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाईं, उनमें दागी नेताओं पर दर्ज मामले वापस लेना, विधानसभा के एजेंडे में बदलाव करना, एसजेवीएनएल का एनटीपीसी पर मर्जर, आउटसोर्स आधार पर भर्ती करने के निर्णय, सत्र के दौरान मंत्रिमंडल की बैठक कर स्कूल वर्दी के टेंडर रद्द करने, सदन को न बताने और बिगड़ती कानून-व्यवस्था शामिल थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें