सीमेंट, ईंट, सरिया, रेत और मजदूरी की लागत बढ़ने के साथ ही दुर्गम क्षेत्रों तक निर्माण सामग्री पहुंचाने में भी अतिरिक्त खर्च आता है। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 87,707 मकान स्वीकृत हुए हैं। इनमें 55,207 मकान पूरे हो चुके हैं, जबकि 32,497 मकान निर्माणाधीन हैं। वर्ष 2030 तक प्रदेश में 2.37 लाख से अधिक आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि पक्के मकान के लिए 3.63 लाख रुपये प्रति इकाई देने का प्रस्ताव 15 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन 12 अगस्त की बैठक में इसे मंजूरी नहीं मिली।
अब सदन की भावना के अनुरूप संशोधित प्रस्ताव फिर केंद्र को भेजा जाएगा। मंत्री ने कहा कि केंद्र सहायता बढ़ाता है तो राज्य सरकार भी अपने योगदान को करीब 50 हजार रुपये तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इससे पहले संकल्प प्रस्तुत करते हुए विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने आवास सहायता कम से कम तीन लाख रुपये करने की मांग उठाई। विधायक विनोद कुमार ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में निर्माण लागत का निर्धारण स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना था कि गरीब परिवार को पक्का घर मिलने से उनका आत्मसम्मान बढ़ता है और कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित नहीं रहना चाहिए।