मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले छह महीनों में 1171 स्थानांतरण हुए हैं, जिनमें संबंधित कर्मचारियों ने आपसी स्थानांतरण की सहमति दी थी, लेकिन ये स्थानांतरण भी प्रचलित नीति के अनुसार ही हुए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को कर्मचारियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापन के संबंध में सामान्य प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हैं। कर्मचारियों से प्राप्त आपसी स्थानांतरण के आवेदन पत्रों पर प्रकरण-दर-प्रकरण गुण-दोष के आधार पर, प्रशासनिक आवश्यकता, पदों की उपलब्धता और लोकहित को ध्यान में रखते हुए और अधिसूचित नीति के अनुसार विचार किया जाता है। विधायक रणधीर शर्मा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिनियुक्ति का फैसला नीतिगत होता है। ऐसे कम मामलों को ही मंजूर किया जाता है। बहुत अधिक आवश्यकता पर ही ऐसे फैसले होते हैं।
अधिकारियों और एचओडी से बात कर डेफर किया वेतन का हिस्सा : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अधिकारियों और एचओडी से बात करने के बाद ही उनका वेतन में कुछ हिस्सा छह महीने के लिए डेफर किया गया है। उन्हें यह राशि मिलेगी। अधिकारी इस मामले में सरकार के साथ हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से कहा कि आप यह तो मान गए कि आप और विपक्ष के सदस्य भी इससे सहमत हैं। इससे साफ है कि आप इस मामले में कोर्ट नहीं जाएंगे। जयराम ठाकुर की ओर से बजट भाषण पर चर्चा के दौरान पेश किए गए आंकड़ों पर सीएम ने कहा कि जितने आंकड़े अभी पढ़े हैं, अगर आप वित्त मंत्री रहते स्थिति सुधारते तो आज ये स्थिति पैदा नहीं होती। सरकार वित्तीय स्थिति सुधार कर हिमाचल को आत्मनिर्भर बना रही है।
उन्होंने कहा कि यह आंकड़े सही नहीं है और जिन्होंने भी दिए हैं पूरी डिटेल में नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष में लोन की लिमिट तय होती है। सरकार ने छह महीने के लिए वेतन डेफर किया है। सीएम ने कहा कि प्रदेश आर्थिक संकट में नहीं है और राज्य आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। विधवा और अनाथ बच्चों के बेहतर जीवनयापन के लिए पैसा खर्च करेंगे। इन्हें कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए यह बिल लाया गया है, जिससे वे किसी के सामने हाथ ने फैलाए। आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए जरूरी है। सीएम ने कहा कि विमल नेगी मौत की जांच सीबीआई कर रही है, एक साल बाद भी अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों का ओपीएस नहीं लगा है, उन्हें भी 2032 तक ओपीएस लगाएंगे। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बजट भाषण पर चर्चा के दौरान कहा कि आंध्र प्रदेश में भी कोरोना काल के दौरान अधिकारियों की सैलरी में कट लगाया गया था। मामला कोर्ट में गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सैलरी पर कट नहीं लगाया जा सकता है।