जयराम ठाकुर ने ये कहा
जयराम ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय गीत का अपमान कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यालय में हुआ है। उन्होंने कहा कि जो बात सदन के अंदर हुई ही नहीं, उसके बारे में बयान देने पर मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए। इस बारे में सदन में क्लिपिंग दिखाएं। सभी भाजपा विधायक सावधान की मुद्रा में खड़े थे। उसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय गीत न गाने का मामला उठाया। जयराम ने कहा कि वर्ष 1937 में कांग्रेस ने एक समुदाय की आपत्ति के कारण वंदे मातरम को पूरा नहीं गाने का निर्णय लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह की सोच के कारण देश का विभाजन भी हुआ।
सदन में मुख्यमंत्री ने भी लगाए नारे
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत दोनों ही कांग्रेस की देन हैं और इनके पीछे देश के लिए बलिदान देने वालों का इतिहास है। ये किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं। उन्होंने कहा कि सदन में जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे ही राष्ट्रीय गान का अपमान कहते हैं। मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक दल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। भाजपा विधायक दल के हंगामे के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने खुद भी सदन के भीतर नारे लगाने शुरू कर दिए। विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताई तो मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत का अपमान होगा तो नारे भी लगेंगे। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से जमकर नारेबाजी हुई। हंगामे के बीच सदन की बैठक दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय के बाद धरने पर बैठे भाजपा विधायक
वहीं दो बजे जब बैठक दोबारा शुरू हुई तो सदन में गतिरोध बरकरार रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर नारेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 24 अगस्त दोपहर 2:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उधर, बैठक स्थगित होने पर भाजपा विधायक दल विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और सदन चलाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। इस तरह मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही भी हंगामे के भेंट चढ़ गई।