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राहुल के सामने बाली को सीएम बनाने के लगे नारे, नाराज वीरभद्र सिंह ने छोड़ा माइक

Tue, 07 Nov 2017 08:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नगरोटा बगवां (कांगड़ा)
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राहुल गांधी और वीरभद्र सिंह की मौजूदगी में सोमवार को मंत्री जीएस बाली समर्थकों ने बाली के सीएम बनने के नारे लगा दिए।  मंच से कांग्रेस प्रत्याशी बाली ने समर्थकों को शांत करने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने और नारे लगाते रहे।  
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इस पर सीएम वीरभद्र सिंह बुरी तरह नाराज हो गए। उन्होंने बाली समर्थकों को फटकार लगाई। सूत्रों के मुताबिक नगरोटा बगवां मैदान में आयोजित राहुल गांधी की रैली में वीरभद्र सिंह नहीं जाना चाहते थे। 

यह वही जगह हैं जहां चुनाव से पहले कांग्रेस प्रभारी सुशील कुमार शिंदे और बाली की मौजूदगी में सरेआम मंच से वीरभद्र सिंह को ब्लैकशीप यानी काली भेड़ कहा गया था। उन्हें काली भेड़ कहने वाले को किसी ने रोका भी नहीं था। 
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इससे सीएम वीरभद्र आहत थे। वह बाली के प्रचार में नगरोटा नहीं जाना चाहते थे। लेकिन चम्बा की रैली के बाद राहुल गांधी वीरभद्र सिंह को जबरन बाली के प्रचार में ले आए। रैली के शुरू होने से पहले जैसे ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने माइक संभाला तो कार्यकर्ता बाली को सीएम बनाने के नारे लगाने लगे। 

इससे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह नाराज हो गए। उन्होंने नारेबाजी करने पर मंच से कार्यकर्ताओं को लताड़ लगाई। उन्होंने कार्यकर्ताओं को कहा -अनुशासन सीखो। क्या समझ रखा है आप लोगों ने। सीएम की लताड़ के बाद कार्यकर्ता चुप हो गए। 

सीएम वीरभद्र अपना भाषण पूरा करने से पहले ही माइक छोड़ गए। उधर, बाली ने राहुल गांधी की रैली में भारी भीड़ जुटाकर खुद को एक बार फिर से कांगड़ा का अगुवा नेता साबित करने की कोशिश की। राहुल गांधी ने देरी से पहुंचने पर जनसभा से माफी मांगी। 

राहुल गांधी करीब सवा दो घंटे देरी से जनसभा में पहुंचे। लेकिन, मैदान दोपहर दो बजे तक भर गया था। बाली ने प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा का विशेष ख्याल रखने का राहुल गांधी से आग्रह किया। समय की कमी के कारण पार्टी के प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे ने भाषण नहीं दिया। 
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मोदी ने मजबूरी में धूमल को बनाया सीएम चेहरा : आनंद 

राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूरी ने प्रो. प्रेम कुमार धूमल को मजबूरी में ही सीएम पद का चेहरा घोषित किया है। जब मोदी हिमाचल आए तो उन्होंने पाया कि यहां तक उनकी जमीन कांप रही है।

अब घाटा-नफा जो भी होगा, वह धूमल का ही होगा। जिस तरह से नरेंद्र मोदी ने राज्यों में चुनाव प्रचार को डेरा डाला हुआ है, उससे एक सवाल खड़ा होता है कि देश को चला कौन रहा है। इसी तरह से दुष्प्रचार को ही अधिक वक्त देने से ही तो मोदी सरकार देश के विकास कार्यों पर फोकस नहीं कर पा रही है। 

प्रधानमंत्री अगर हिमाचल में अपने बूते बड़ी जीत से आश्वस्त होते तो वे धूमल को सीएम पद का कतई चेहरा घोषित नहीं करते। कौन से सुदामा और कौन से गरीब आदमी ने भाजपा को प्रचार के लिए इतना धन दिया है कि सारे मीडिया माध्यम और अन्य स्रोत प्रचार सामग्री से अटे पडे़ हैं।

क्या कांग्रेस भाजपा से कम आक्रामक होकर प्रचार कर रही है? इस सवाल के जवाब में आनंद शर्मा बोले - हम आक्रामक हैं और अभद्र नहीं हैं। हम निचले स्तर तक गिरकर जवाब नहीं देते। 

संसद क्यों नहीं बुला रहे हैं मोदी : आनंद
आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक संसद को क्योें नहीं बुला रहे हैं। वे चाहते हैं कि गुजरात चुनाव में संसद के भीतर विपक्ष के आक्रामक रुख से कोई नुकसान न हो जाए। मोदी के प्रचार में हिंसा और दुष्प्रचार साफ नजर आ रही है। आज भी उन्होंने माफी नहीं मांगी। मोदी ने काले धन की बात की है, मगर काले धन के कुबेर तो बीजेपी के पास ही हैं।
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