पूर्व मंत्री खीमीराम शर्मा भाजपा की टिकट सूची से नाम गायब होने पर मायूस हैं। समर्थकों के दबाव में वे बंजार से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि, अभी उन्होंने इस संबंध में सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन अमर उजाला से बातचीत में कांग्रेस की सूची आने का इंतजार करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सूची आने के बाद ही वे फैसला लेंगे। ऐसे में उनके कांग्रेस में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी माने जाने वाले खीमीराम का टिकट कटने से धूमल समर्थक भी सकते में हैं।
समर्थकों ने बगावती तेवर अपना लिए हैं। टिकट कटने की सूचना पर दो दिन पूर्व खीमीराम गुपचुप तरीके से अपने आवास पर समर्थकों के साथ बैठक भी कर चुके हैं। जिला परिषद चुनाव से राजनीति में आने वाले खीमीराम शर्मा का भाजपा संगठन में काफी अनुभव रहा है।
साल 1999 में उन्होंने बतौर जिला परिषद चुनाव लड़ा। बाद में जिला परिषद अध्यक्ष भी बने। दो बार विधायक रहे खीमीराम शर्मा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। धूमल सरकार में मंत्री पद भी संभाला है। अनुभवी राजनीतिज्ञ होने के बावजूद उनका टिकट कटने से समर्थक भी दंग हैं।
उधर, निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के सवाल पर पूर्व मंत्री खीमीराम शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सूची देखने के बाद ही इस संदर्भ कुछ कह पाएंगे।