मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव न लड़ने से अधिकांश मतदाता दुखी हैं।
साल 2012 के चुनावों में अस्तित्व में आए इस नए विधानसभा क्षेत्र में वोट मांगने आ रहे कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों से यहां की जनता सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही है कि ‘तु ऐथी टिके रौणे कि हामे छाडी रौ डेई जाणें’ (तुम इसी क्षेत्र में टिके रहोगे या फिर हमें छोड़कर चले जाओगे)।
मतदाताओं के यह सवाल सुनकर प्रत्याशी भी चौंक जा रहे हैं। शिमला ग्रामीण में जब लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों से सिर्फ एक ही बात पूछी जा रही है कि हमारे क्षेत्र तौ हर बार एमएलए बदलदा ही रहौंदा लगा, हर बार नौउआ ही एमएलए आओ, तुम्हें भी टिके रौणें की भागे जाणें।
लोगों ने बताया कि भाजपा प्रत्याशी प्रमोद शर्मा मतदाताओं को सुन्नी-कुमारसैन विधानसभा क्षेत्र के दिनों की याद दिलाकर जीत की अपील कर रहे हैं। लोगों से कह रहे हैं कि मैं तो पुराना ही हूं। पहले भी यहां से चुनाव लड़ चुका हूं।
उधर, कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह अपने पिता वीरभद्र सिंह द्वारा बीते पांच साल के दौरान किए गए विकास कार्यों को गिना रहे हैं। कहते हैं कि मैं इस क्षेत्र को कभी छोड़कर नहीं जाऊंगा। पिता ने इस क्षेत्र के लोगों की सेवा का जिम्मा मुझे सौंपकर बड़ी जिम्मेवारी दी है।
जिस तरह वीरभद्र सिंह ने क्षेत्र की सेवा की, मैं भी वैसे ही सेवा करूंगा। दोनों प्रत्याशियों की ये बातें सुनकर अब मतदाता भी पसोपेश में पड़ गए हैं। उधर, कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह के लिए उनकी बहन अपराजिता सिंह और जीजा अंगद सिंह (पंजाब से विधायक) चुनाव प्रचार कर रहे हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी क्षेत्र में जनसंपर्क किया। भाजपा प्रत्याशी प्रमोद शर्मा के लिए कई केंद्रीय मंत्रियों ने क्षेत्र में मोर्चा संभाला हुआ है।