सीएम वीरभद्र सिंह अब दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं। नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठक में इस पर मंथन किया गया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इस बार ठियोग और अर्की दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ सकते हैं।
दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ बैठकों में इस पर मंथन हो रहा है। कांग्रेस के दिग्गज चाहते हैं कि लगातार हारने वाली अर्की सीट पर जीत को सुनिश्चित करने की जरूरत है।
अर्की क्षेत्र से जिताऊ उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह वहां से चुनाव लड़ने को तैयार हो सकते हैं। ठियोग से पहले अर्की से ही वीरभद्र सिंह के चुनाव लड़ने की मांग उठी थी।
वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स ने ठियोग से चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर उन्हें अपनी सीट ऑफर की है। वीरभद्र सिंह खुद भी ठियोग से चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। मंगलवार को नई दिल्ली में भंवर जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में छंटनी कमेटी की बैठक हुई।
इस में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू शामिल हुए। प्रदेश चुनाव समिति ने ठियोग सीट से वीरभद्र सिंह का अकेला नाम भेजा है। अर्की सीट पर भी उनके नाम पर चर्चा हुई।
नामांकन की तैयारियां करने को कहा
अर्की सीट से प्रत्याशियों के पैनल में संजय अवस्थी, डा. कैलाश पराशर, सुशील ठाकुर, राजेंद्र ठाकुर, अमर चंद पाल और इंद्र सिंह ठाकुर शामिल हैं। पार्टी यहां से जिताऊ प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। अब ये चर्चा है कि ऐसी स्थिति में सीएम दोनों ही सीटों पर अपना दमखम दिखाने को तैयार हैं।
उधर, मंत्री विद्या स्टोक्स का कहना है कि उनकी मुख्यमंत्री से बात हुई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को 20 अक्तूबर को नामांकन की तैयारियां करने को कहा है। वे ठियोग से नामांकन भरेंगे, अर्की की उन्हें जानकारी नहीं है।
पहले भी दो सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं वीरभद्र
वीरभद्र सिंह इससे पहले भी दो सीटों पर चुनाव लड़ चुके हैं। 1989 में वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू और कोटखाई से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वे रोहड़ू से तो जीत गए, लेकिन कोटखाई से भाजपा प्रत्याशी रामलाल ठाकुर से नहीं जीत पाए थे।