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हिमाचल में चुनावी बिगुल बजते ही भाजपा और कांग्रेस का चक्रव्यूह तैयार

Fri, 13 Oct 2017 01:15 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में चुनावी बिगुल बजते ही भाजपा और कांग्रेस ने विरोधियों के खिलाफ चक्रव्यूह तैयार कर लिया है। चुनावी जंग में भाजपा भ्रष्टाचार तो कांग्रेस 5 वर्ष के विकास को लेकर, तो भाजपा भ्रष्टाचार को कांग्रेस के खिलाफ हथियार बनाएगी।
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अगले 28 दिन में दोनों दलों के सियासी रणनीतिकार एक दूसरे के खिलाफ कई मुद्दों पर मोर्चा खोलेंगे। कांग्रेस सीएम वीरभद्र सिंह पर सीबीआई और ईडी की चार्जशीट पर घिरेगी।

उधर, कांग्रेस को यूपी और उत्तराखंड में चला मोदी का सुशासन फार्मूला हिमाचल में फेल साबित करना रहेगा। गिरती अर्थव्यवस्था पर कांग्रेस का हमलावर रुख भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 
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ये है असल अग्निपरीक्षा

भाजपा की मुख्यमंत्री चेहरा नहीं देने की रणनीति की हिमाचल चुनावों में असल अग्निपरीक्षा है। फिलहाल, दोनों ही दलों में टिकटों पर घमासान मचा हुआ है। प्रत्याशी सूची जारी होने के बाद टिकट कटने वाले दावेदारों को साथ बनाए रखने में दोनों की तरफ के चुनावी प्रबंधन की साख टिकी है।

भाजपा ने चुनाव प्रबंधन  से लेकर तमाम कमेटियां बना ली हैं। अन्य राज्य से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं संघ के कार्यकर्ताओं को तैनात किया जा चुका है, जबकि कांग्रेस अभी तक टिकट तय करने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी, चुनाव प्रबंधन समिति आदि गठित नहीं कर पाई है।

इतना ही कोई भी दल अभी तक घोषणा पत्र जारी नहीं पाया है,  ऐसे में जनता को नई सरकार का विजन तक स्पष्ट नहीं है।
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दोनों दलों की चुनौतियां

दोनों की दलों के लिए 68 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन करने के बाद स्टार प्रचार अभियान शुरू करना असल परीक्षा है। प्रचार अभियान में अब तक पिछड़ती दिख रही कांग्रेस को भाजपा को टक्कर देने के लिए मेहनत करनी होगी।

स्टार प्रचारकों में भाजपा के लिए प्रधानमंत्री मोदी सहित अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्रियों के नाम रहेंगे। कांग्रेस को भाजपा के स्टार प्रचार को टक्कर देने की मजबूत रणनीति देनी होगी।

भाजपा की चुनौतियां
- सीएम पद के लिए चेहरा नहीं देना
- नोटबंदी और जीएसटी का असर
- धूमल और नड्डा खेमे को एक साथ रखना
- हर सीट पर पार्टी टिकट के कई हैं दावेदार
- कांग्रेस सरकार के पांच साल के काम

कांग्रेस के लिए चुनौतियां
- पांच साल में सत्तासीन रहने पर एंटी इंकम्बैंसी
- पांच वर्ष बाद सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड
- वीरभद्र पर चल रहे ईडी और सीबीआई के मामले
- संगठन के साथ वीरभद्र के तालमेल पर सवाल
- टिकट आवंटन की प्रक्रिया में आम सहमति बनाना
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