भाजपा में प्रत्याशी सूची जारी करने की जगह गुपचुप प्रत्याशियों को पार्टी सिंबल आवंटित करने से प्रदेश में बगावत की आग भड़क गई है। पार्टी सिंबल के साथ दो प्रत्याशियों ने मंगलवार को नामांकन भरा, जबकि दो ने बिना अथॉरिटी लेटर आवेदन कर दिया है।
टिकटों की आधिकारिक घोषणा की जगह पार्टी सिंबल पत्र बांटने से कैडर में गफलत की स्थिति पैदा हो गई है। स्थिति स्पष्ट नहीं करने से कई सीटों पर आक्रोश भड़क गया है। कई विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा मंडल दोफाड़ होने की कगार पर है।
टिकट कटने से आहत दावेदार निर्दलीय उतरने की ताल ठोक रहे हैं जबकि विधानसभाओं में पार्टी मंडल इस्तीफे दे रहे हैं। पार्टी की बड़ी चिंता है कि बगावत की चिंगारी अगर और भड़की तो चुनाव में पासा ही न पलट जाए।
सूची जारी होने से पहले नामांकनों का शुरू हुआ दौर पार्टी चुनाव प्रबंधन की पोल खोल रहा है। अब सारा दारोमदार डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर टिका है।
62 की सूची फाइनल, अभी तक घोषणा नहीं
भाजपा ने 62 प्रत्याशियों की सूची फाइनल कर दी है, लेकिन अभी तक उसकी घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ कई दावेदारों को प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती का 17 अक्तूबर का हस्ताक्षरित भाजपा का आधिकारिक प्रत्याशी होने वाला पत्र जारी किया गया है।
प्रत्याशी के तौर पर चार नेता धर्मपुर से महेंद्र सिंह, जसवां परागपुर से विक्रम सिंह और विनोद कुमार के अलावा नादौन से विजय अग्निहोत्री ने नामांकन भर दिया है। भाजपा का हिमाचल में यह नया फॉर्मूला गुल खिलाने लगा है।
कई जगह टिकट कटने की सूचना भर से पार्टी में घमासान मच गया है। दावेदारों के साथ समर्थक भी हैरान परेशान हैं। विधानसभाओं में पार्टी की रणनीति के खिलाफ खुलेआम कार्यकर्ताओं की बैठकें हो रही हैं।
प्रत्याशी सूची जारी करने में हो रही देरी और नामांकन प्रक्रिया शुरू करने से कई सीटों पर भितरघात के आसार हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता स्थिति साफ नहीं कर रहे हैं कि किस तरह कुछ को सिंबल दे दिया गया है।
भारी न पड़े शांता-धूमल की अनदेखी
दिल्ली से संभावित प्रत्याशियों को लेकर आ रहीं सूचनाएं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार समर्थकों के लिए झटका माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की जगह केंद्रीय नेतृत्व ने नड्डा के मन की सुनी है।
शांता कुमार की कांगड़ा में अनदेखी होने की चर्चाओं से कई जगह उनके समर्थक पार्टी के विरोध में उतरने लगे हैं। पालमपुर विधानसभा से अगर शांता समर्थक को टिकट नहीं मिलता है तो उसका खामियाजा झेलना पड़ सकता है।
धूमल समर्थकों को उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने की उम्मीद तो भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने पूरी नहीं की है, जबकि उन्हें हमीरपुर से सुजानपुर भेज दिया।
घोषित सूची के बाद माने जाएंगे प्रत्याशी
आधिकारिक अथॉरिटी पत्र लेकर नामांकन दाखिल करने से पैदा हुई स्थिति पर प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने स्थिति साफ की है। सत्ती ने कहा कि अभी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर किसी को प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
60 से अधिक सीटों पर नाम तय हो चुके हैं। विवाद जैसी कोई स्थिति नहीं है। नाम घोषित होने के बाद ही प्रत्याशियों को आधिकारिक माना जाएगा, हालांकि कुछ लोगों के निवेदन पर उन्हें नामांकन भरने दिया है।
नामांकन की अंतिम तिथि तक अथॉरिटी लेटर दिया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं कि जिन नामों की चर्चा सोशल मीडिया में चल रही है उनके टिकट पक्के हैं।
इन सीटों पर बगावत तेज
पालमपुर- इंदु गोस्वामी के संभावित प्रत्याशी होने से उनकी खिलाफत तेज हो गई है। पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा समर्थकों ने किया हंगामा।
धर्मशाला- उमेश दत्त की टिकट फाइनल होने की अनाधिकारिक सूचना से पूर्व मंत्री किशन कपूर ने विरोध का झंडा बुलंद किया।
फतेहपुर- कृपाल परमार की टिकट तय बताई जा रही है, जिसके बाद वहां भाजपा का धड़ा विरोध में उतर गया है।
झंडूता- सिटिंग विधायक रिखी राम कौंडल की टिकट कटने की बात से वहां उनके समर्थकों ने बागावत का एलान कर दिया।
बिलासपुर सदर- पूर्व सांसद सुरेश चंदेल ने टिकट घोषित नहीं होने पर निर्दलीय उतरने के विकल्प खुले रखे हैं।
हमीरपुर- नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल को सुजानपुर भेजने के बाद वहां जिले के कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफे सौंप दिए हैं।
बंजार- दावेदार खिमी राम का नाम बाहर होने की चर्चा के बाद उनके समर्थकों ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।