यह सब चट मंगनी पट ब्याह जैसा है। हिमाचल में सत्ता संग्राम का बिगुल बजते ही सभी सियासी दलों के संभावित प्रत्याशियों के माथे पर शिकन पड़ गई है। आज से लेकर मतगणना तक सारा खेल सिर्फ 28 दिन का है। 70 प्रतिशत प्रत्याशी अब तक नहीं जानते कि उन्हें टिकट मिलेगा या नहीं।
टिकट के तलबगारों की एक लंबी फेहरिस्त है। इन 28 दिन में प्रत्याशियों को न सिर्फ चुनाव लड़ने की प्रक्रिया पूरी करनी है बल्कि अपने क्षेत्र में जाकर प्रचार भी करना है। जबकि दोनों प्रमुख पार्टियों की चिंता यह है कि इतने कम दिन में वह चुनाव प्रबंधन कैसे करेंगे। ऐसी विकट स्थिति शायद ही कभी सियासी दलों के सामने चुनाव से ऐन पहले आई हो।
हिमाचल के जारी चुनाव कार्यक्रम ने राजनीतिक दलों का चुनावी गणित बिगाड़ दिया है। 16 अक्तूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है। अगर नामांकन प्रक्रिया तक प्रत्याशी घोषित हो भी हो जाते हैं, तो टिकट कटने से असंतुष्ट को मनाने से जूझना पड़ेगा।