राजनीति से संन्यास के एलान के बाद बेमन से विधानसभा चुनाव में उतरीं कांग्रेस की वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स का नामांकन रद्द हो गया है। ठियोग सीट से अब पहले नामांकन करने वाले दीपक राठौर ही कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे।
मंगलवार को नामांकन पत्रों की छंटनी के बाद चुनाव आयोग ने 90 वर्षीय स्टोक्स को बड़ा झटका दिया है। अब तक विभिन्न चुनावों में एक दर्जन से ज्यादा नामांकन पत्र भरने वाली मंत्री का आखिरी पर्चा सही नहीं पाया गया है।
छंटनी के दौरान इस पर पेच फंसा कि कांग्रेस के चिन्ह पर पहला आवेदन दीपक राठौर का आया। उसके बाद स्टोक्स ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर दूसरा आवेदन किया।
नियमानुसार जब एक ही पार्टी के दो लोग नामांकन करते हैं तो बाद में आवेदन करने वाले प्रत्याशी का नामांकन रद्द किया जाता है। स्टोक्स से यही बड़ी गलती हुई। नामांकन भरने के आखिरी दिन सोमवार को दीपक राठौर ने करीब दो बजे जबकि स्टोक्स ने पौने तीन बजे नामांकन भरा।
ये गलती भी पड़ी भारी
दूसरा, स्टोक्स ने जो अधिकार पत्र और फार्म बी जमा करवाया था वह कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू की तरफ से था जबकि राठौर को पत्र और फार्म बी पार्टी के केंद्रीय चुनाव समिति के प्रभारी आस्कर फर्नांडीस की तरफ से जारी किया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से जो पत्र जारी किया गया था उसमें इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं था कि राठौर के स्थान पर पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी विद्या स्टोक्स होंगी। इसके अलावा नामांकन आवेदन में भी कुछ खामी पाई गईं। सूत्र बता रहे हैं कि स्टोक्स के नामांकन पत्र में कुछ कॉलम अधूरे छोड़े गए हैं।
छंटनी प्रक्रिया के बाद मंगलवार शाम को ब्लॉक निर्वाचन अधिकारी ठियोग ने नोटिस बोर्ड में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर दीपक राठौर को नामांकित कर दिया। एसडीएम ठियोग टाशी संडूप ने बताया कि कानूनी राय लेने के बाद स्टोक्स का नामांकन रद्द किया गया है। दीपक राठौर को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किया गया है।
ऐसे बिगड़ा पूरा मामला
कांग्रेस हाईकमान ठियोग सीट पर अंतिम समय तक फैसला नहीं ले पाया। ठियोग से पहले राठौर को टिकट दिया और बाद में स्टोक्स को भी पार्टी सिंबल जारी कर दिया।
स्टोक्स को आश्वस्त किया कि दीपक राठौर से नामांकन वापस लेने को कहा जाएगा। राठौर पीछे हटने को तैयार भी थे, लेकिन हाईकमान ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसी से सब गड़बड़ हुई।
स्टोक्स के पास अब कोई विकल्प नहीं
स्टोक्स के पास अब नामांकन को चुनौती देने का कोई विकल्प नहीं हैं। इस बार वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। उनके राजनीतिक कॅरिअर की विदाई ऐसे होगी किसी ने सोचा भी न था। वे शुरू से ही चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं थीं।
उन्होंने अपनी सीट वीरभद्र के लिए छोड़ रिटायरमेंट का एलान कर दिया। वीरभद्र सिंह के ठियोग से चुनाव न लड़ने के बाद वे अपने पसंदीदा प्रत्याशी को टिकट न देने के बाद मजबूरी में चुनाव मैदान में उतरीं थीं।
1974 में पहली बार जीती थीं स्टोक्स
विद्या स्टोक्स ने का राजनीतिक सफर 1974 में शुरू हुआ। स्टोक्स के पति लाल चंद स्टोक्स के आकस्मिक निधन के कारण ठियोग विधानसभा चुनाव से वे बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उतरी। 43 वर्ष लंबे राजनीतिक करियर उन्होंने 10 बार विधानसभा चुनाव लड़ा है।
दो बार स्टोक्स को वर्ष 1977 और 1993 चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 1982, 1985, 1990 और 1998 में ठियोग स हीे चुनाव जीती। कैबिनेट मंत्री जेबीएल खाची के निधन के बाद स्टोक्स ने ठियोग से विधानसभा हलका बदल कर कुमारसैन से वर्ष 2003 और 2007 में चुनाव जीता। परिसीमन के बाद कुमारसैन सीट खत्म होने के बाद 2012 में दोबारा ठियोग से चुनाव में उतरी और जीतीं।